कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण को ध्यान में रखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश को 21 दिनों के लिए लॉकडाउन कर दिया है। लॉकडाउन के चलते आम लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है लेकिन समाज का एक तबका ऐसा भी है जो इस लॉकडाउन की वजह से भूखा सो रहा है। पैसे की कमी की वजह से कुछ लोगों को एक टाइम का भोजन भी नसीब नहीं हो रहा है।
ईटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक साउथ दिल्ली के छतरपुर स्थित फतेहपुर बेरी इलाके में रहने वाले कुछ मजदूरों ने पिछले चार दिनों से कुछ नहीं खाया है। मजदूरों का कहना है कि वे लॉकडाउन के चलते उनके पास कोई काम नहीं हैं। जिसके चलते पैसे कि तंगी है। वे दिहाड़ी मजदूर हैं सभी रोजाना कमाते थे और अपने परिवार का पालन पोषण करते थे। लॉकडाउन के दौरान जो पैसे बचे थे उससे एक दो दिन तो किसी तरह गुजर गए लेकिन अब उनकी परेशानियां बढ़ गईं हैं।
इस दौरान ईटीवी ने कुछ बच्चों से भी बात की। एक बच्चा कैमरे के सामने बात करते करते रोने लगा। बच्चे ने पत्रकार से कहा ‘मैं चार दिनों से भूखा हूं, मैंने कुछ भी नहीं खाया। मेरे पापा बाज़ार जाते हैं तो पुलिस मारती है।” एक अन्य बच्चे ने कहा “हमारे पास न कहने को है न साफ पानी पीने के लिए है। मम्मी ने चार दिन से खाना नहीं बनाया।”
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इन मजदूरों के पास कोई राशन कार्ड भी नहीं है। सभी यूपी और बिहार से आकर यहां रोजाना मजदूरी कर अपना और अपने बच्चों का पेट पालते थे। दिल्ली में जनता कर्फ्यू के बाद लॉकडाउन से अब ये अपने गांव भी नहीं जा सकते और न कोई काम कर सकते हैं।
कोरोना से लड़ने के लिए और गरीबों की इस मुश्किल वक़्त में मदद करने के लिए सरकार ने 1.70 लाख करोड़ रुपये के राहत पैकेज की घोषणा की है। वित्त मंत्री ने राहत पैकेज में सभी श्रेणी के लोगों की सहायता को ध्यान में रखकर यह कदम उठाया है। उन्होंने कोरोना वायरस महामारी से निपटने के लिये जुटे डाक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों के लिये 50 लाख रुपये के बीमा कवर की घोषणा भी की है।
वित्त मंत्री ने कहा कि राशन की दुकानों से 80 करोड़ परिवारों को 5 किलो गेहूं या चावल के साथ एक किलो दाल तीन महीने के लिये मुफ्त दी जायेगी। सीतारमण ने तीन करोड़ गरीब वृद्धों, गरीब विधवाओं तथा गरीब दिव्यांगों को एक-एक हजार रुपये की अनुग्रह राशि देने की भी घोषणा की है।
