दिल्ली की एक जिला उपभोक्ता विवाद निवारण फोरम (कंज्यूमर फोरम) ने इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉरपोरेशन (आईआरसीटीसी) को शिकायतकर्ता को 45 हजार रुपये बतौर हर्जाना देने का आदेश दिया है। वजह से है कि आईआरसीटीसी ने पैसेंजर की जानकारी के बिना उसकी तीन रिजर्व टिकट को रद्द कर दिया था। उपभोक्ता विवाद निवारण फोरम ने पाया कि पैसेंजर की जानकारी के बिना आईआरसीटीसी ने थर्ड पार्टी के ई-मेल के आधार पर टिकट रद्द कर दिया था। इसके बाद कंज्यूमर पैनल ने कहा कि टिकट की कीमत को लौटाना ही काफी नहीं है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कंज्यूमर पैनल ने कहा, “आईआरसीटीसी ने बताया कि उन्होंने रोहित शर्मा के आदेश पर रिजर्व टिकट को रद्द किया था। टिकट रद्द करने का आग्रह शिकायतकर्ता द्वारा नहीं किया गया था। हमारे विचार से आईआरसीटीसी द्वारा प्रदान की जा रही सेवा की यह साफ गलती थी, इसलिए सिर्फ टिकट का मूल्य वापस करना पर्याप्त नहीं है।” कथित तौर पर शिकायर्ता सुशोवन गुप्ता राय ने कहा कि सियालदह से नई दिल्ली जाने के लिए उनके परिवार का टिकट था। यात्रा की तिथि के दिन उन्हें आईआरसीटीसी के एक ई-मेल मिला, जिसमें लिखा हुआ था कि उनके तीनों टिकट रद्द कर दिए गए।

कंज्यूमर पैनल ने पाया, “पूछताछ करने पर पता चला कि ई-मेल के माध्यम से रोहित शर्मा ने टिकट रद्द करने का निर्देश दिया था। शिकायतकर्ता ने यह साफ तौर पर बताया कि वह किसी रोहित शर्मा को नहीं जानता है। टिकट रद्द होने की वजह से वह अपनी तय यात्रा पर नहीं जा सका।” कथित तौर पर, इसके बाद पैसेंजर ने 20 हजार रुपये खर्च कर प्लेन का टिकट बुक किया था।

हालांकि, आईआरसीटीसी ने तर्क दिया कि उनकी ओर से किसी तरह की गलती नहीं की गई थी। जांच के बाद शिकायतकर्ता को टिकट का रद्द कराने का चार्ज वापस कर दिया गया। पैनल ने पाया, “शिकायतकर्ता का मामला सही पाए जाने के बाद 3,450 रुपये खाते में वापस कर दिए गए, लेकिन शिकायतकर्ता इससे नाराज हो गया और कहा कि उसे मानसिक तौर पर परेशानी तो हुई, उसके मुकदमेबाजी में खर्च के साथ आर्थिक क्षति भी हुई। इसलिए उसे हर्जाना मिलना चाहिए।” कंज्यूमर फोरम ने मानसिक परेशानी के लिए 15 हजार और 10 हजार मुकदमेबाजी में हुए खर्च को भी देने का आदेश दिया।