असम के धींग विधानसभा क्षेत्र से एआईयूडीएफ विधायक अमीनुल इस्लाम ने शनिवार को विधानसभा के शीतकालीन सत्र के आखिरी दिन हिस्सा लिया। एनएसए के तहत छह महीने की नजरबंदी के बाद उन्हें रिहा कर दिया गया। एनएसए के तहत हिरासत को गुवाहाटी हाई कोर्ट ने रद्द कर दिया था।
विधानसभा भवन के बाहर पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा कि उनकी नजरबंदी राज्य सरकार द्वारा बदले की कार्रवाई है। उन्होंने कहा, “मैं 218 दिनों तक जेल में रहा और कल ही रिहा हुआ हूं। मैंने केंद्र सरकार से बस एक सवाल उठाया था, पहलगाम जैसी संवेदनशील टूरिस्ट प्लेस में बिना सुरक्षा के पाकिस्तानी आतंकवादी कैसे घुस सकते हैं और 26-28 लोगों को गोली मारकर भाग सकते हैं? यही मेरा बयान था। इसी वजह से मेरे खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई। अगर केंद्र सरकार भारतीय नागरिकों की जान की सुरक्षा करने में नाकाम रही, तो एक विपक्षी विधायक होने के नाते क्या मुझे भारत सरकार, श्रीलंका सरकार या दक्षिण अफ्रीका सरकार से सवाल करना चाहिए? कौन जवाबदेह है।”
मुझे एनएसए के तहत गिरफ्तार कर लिया- अमीनुल इस्लाम
अमीनुल इस्लाम ने आगे कहा, “खैर, मेरे खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई। उसके बाद, मुझे नागांव की एक निचली अदालत ने 15 दिन बाद जमानत दे दी। लेकिन राज्य सरकार ने मुझे जाने नहीं दिया और उसी दिन उन्होंने मुझे राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत गिरफ्तार करने का आदेश भेज दिया।”
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उन्होंने कहा, “मैं सही हूं या गलत, यह तो अदालतें तय करेंगी, लेकिन सरकार ने मुझे पूरी तरह से राजनीतिक मंशा से हिरासत में लिया है। इसकी वजह यह है कि मैं विधानसभा में बहुत मुखर रहता हूं, जिससे सरकार की पोल खुल जाती है। इसी मौके का फायदा उठाकर सरकार ने मुझसे बदला लिया।”
इस्लाम को कई धाराओं के तहत किया गया था गिरफ्तार
इस्लाम को 24 अप्रैल को आईपीसी की धारा 152 सहित कई आरोपों के तहत गिरफ्तार किया गया था, क्योंकि उन्होंने एक राजनीतिक रैली में यह बयान दिया था कि यह हमला केंद्र की बीजेपी सरकार की साजिश थी। भारतीय दंड संहिता की धारा 152 “भारत की संप्रभुता, एकता और अखंडता को खतरे में डालने वाले कृत्यों” से संबंधित है, जो भारतीय दंड संहिता के तहत देशद्रोह के समान है।
पहलगाम आतंकी हमले के बाद असम सरकार द्वारा घोषित पाकिस्तान समर्थकों को हिरासत में लेने के अभियान में सोशल मीडिया पर पोस्ट करने के आरोप में राज्य भर से गिरफ्तार किए गए 58 लोगों में से वह पहले व्यक्ति थे। उन्हें 14 मई को एक डिस्ट्रिक्ट कोर्ट के जज ने जमानत दे दी थी, लेकिन उसी दिन उन्हें रासुका के तहत हिरासत में ले लिया गया था। नागांव के डीसी द्वारा जारी एक आदेश में डिस्ट्रिक्ट एसपी की एक रिपोर्ट का हवाला दिया गया था जिसमें कहा गया था कि इस्लाम “सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने और राज्य की सुरक्षा के लिए हानिकारक गतिविधियों में लिप्त रहे हैं।”
गुवाहाटी हाई कोर्ट ने रद्द कर दिया था आदेश
गुवाहाटी हाई कोर्ट ने उनके एनएसए डिटेंशन आदेशों को रद्द कर दिया था और उनकी रिहाई का आदेश दिया था। इसके बाद शुक्रवार रात उन्हें रिहा कर दिया गया था। ऐसा इसलिए किया गया था क्योंकि उनकी हिरासत के खिलाफ उनके अभ्यावेदन पर अधिकारियों द्वारा अस्पष्ट देरी की गई थी और उन्हें केंद्र सरकार के समक्ष अभ्यावेदन करने के उनके अधिकार के बारे में तब तक सूचित नहीं किया गया था, जब तक कि केंद्र सरकार ने राज्य सरकार को इसकी याद नहीं दिलाई।
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