गुजरात में पटेल समुदाय को अन्य पिछड़ा वर्ग के तहत आरक्षण की मांग को लेकर आंदोलन के दौरान भड़की हिंसा में कम से कम सात लोगों की मौत हो गई। बेकाबू हालात के बाद बुधवार को सेना बुला ली गई। सूबे के कई अहम शहरों में कर्फ्यू लगा दिया गया। कई इलाकों में पुलिस आगजनी और पत्थरबाजी की घटनाओं से जूझती रही।
केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने बुधवार सुबह मुख्यमंत्री आनंदी बेन पटेल से बात की और उन्हें हालात से निपटने में केंद्र की ओर से पूरी तरह मदद का आश्वासन दिया।
राज्य के कुछ हिस्सों में छिटपुट हिंसा की खबरों के बीच सेना ने बुधवार शाम फ्लैग मार्च किए। पुलिस के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जनता से शांति बनाए रखने की अपील के बावजूद पटेल समुदाय के सदस्यों ने आगजनी, पथराव किया और सरकारी व निजी संपत्तियों को नुकसान पहुंचाया।
इस बीच राज्य की मुख्यमंत्री आनंदी बेन पटेल ने इस बात से इनकार किया कि उनकी सरकार ने अमदाबाद में एक रैली में प्रदर्शनकारियों पर लाठी भांजने का आदेश दिया था जिसके बाद हिंसक प्रदर्शन हुए। उन्होंने कहा, ‘मैंने जीएमडीसी मैदान में लाठीचार्ज की घटना के मामले में जांच के आदेश दे दिए हैं। गुजरात के डीसीपी जांच कर रहे हैं। सरकार को रिपोर्ट का इंतजार है। सरकार ने मंगलवार को लाठीचार्ज के लिए या अत्यधिक बल प्रयोग के लिए कोई आदेश नहीं दिया था’।
अमदाबाद, सूरत, मेहसाणा, राजकोट, जामनगर, पालनपुर, उंझा, विसनगर और पाटन शहरों में कर्फ्यू लगा दिया गया है। अमदाबाद के जिला कलक्टर राजकुमार बेनीवाल ने कहा, ‘पटेल समुदाय के आंदोलन की वजह से हिंसा भड़कने के बाद कानून व्यवस्था को नियंत्रण में करने के लिए अमदाबाद शहर में सेना की पांच कंपनियां बुलाई गई हैं’। अर्द्धसैनिक बलों के भी करीब 5000 जवान गुजरात पहुंच गए हैं।
पुलिस ने बताया कि छह लोग पुलिस गोलीबारी में मारे गए, वहीं एक आदमी मंगलवार रात से शुरू हुई हिंसा के दौरान सिर में चोट लगने से मारा गया। तीन मामले अमदाबाद से, तीन बनासकांठा जिले के गढ़ गांव से और एक मामला मेहसाणा कस्बे का है।
इस बीच पटेल अनामत आंदोलन समिति के नेता 22 साल के हार्दिक पटेल ने हिंसा के लिए पुलिस को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि आने वाले दिनों में आंदोलन और तेज होगा। प्रदर्शनकारियों के हिंसा भड़काने के आरोपों को खारिज करते हुए हार्दिक ने पुलिस पर आरोप लगाया कि राजनीतिक तंत्र के इशारे पर आंदोलन को बाधित करने का प्रयास किया जा रहा है।
पटेल समुदाय को ओबीसी कोटे के तहत आरक्षण देने की मांग को लेकर आंदोलन तेज करने की चेतावनी देने वाले हार्दिक पटेल को मंगलवार रात हिरासत में लिए जाने के बाद भड़की हिंसा की आग बुधवार को गुजरात के कई हिस्सों में सुलगती रही। हार्दिक की बंद की अपील के बाद बुधवार को कई जगहों पर सामान्य जनजीवन अस्तव्यस्त रहा और स्कूल, कॉलेज, व्यापारिक प्रतिष्ठान बंद रहे। बैंक और सार्वजनिक परिवहन के साधन भी बंद रहे। पुलिस ने कहा कि आंदोलनकारियों ने राज्य में कम से कम आठ स्थानों पर रेल पटरियों को उखाड़ दिया।
एक व्यक्ति बुधवार दोपहर उत्तरी गुजरात के मेहसाणा कस्बे के बाहरी क्षेत्र में मोधेरा चौराहे पर पथराव कर रही भीड़ पर गोलीबारी में मारा गया। पुलिस अधिकारी रतन सिंह ने कहा, ‘23 राउंड गोली चलाई गई। नीलेश पटेल नामक शख्स मारा गया’। पुलिस ने कहा कि पालनपुर कस्बे के पास गढ़ गांव में एक थाने में आग लगाने की कोशिश कर रही भीड़ पर पुलिस की गोलीबारी में तीन लोग मारे गए।
बनासकांठा के जिला कलक्टर दिलीप राणा ने कहा, ‘दोपहर करीब एक बजे उग्र भीड़ गढ़ थाने में घुस आई और उसे जलाने का प्रयास किया। स्थानीय पुलिसकर्मियों ने अपने बचाव के लिए कुछ राउंड गोलियां चलार्इं जिसमें दो लोगों की मौत हो गई। पालनपुर में किसी अप्रिय घटना से बचने के लिए कर्फ्यू लगा दिया गया है’।
एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के मुताबिक, वस्त्रल इलाके में पुलिस गोलीबारी में दो लोगों की मौत हो गई, वहीं शहर के घाटलोदिया इलाके में एक व्यक्ति का शव मिला। उन्होंने कहा, ‘मंगलवार देर रात पुलिस गोलीबारी में 47 साल के गिरीश पटेल और उनके बेटे सिद्धार्थ पटेल (20) की मौत हो गई’।
अधिकारी ने दावा किया, ‘घटना उस समय घटी जब भीड़ ने पुलिस से हथियार झपटने की कोशिश की। इन दोनों ने एक पुलिसकर्मी से राइफल छीनने की कोशिश की थी और इस दौरान झड़प में वे मारे गए’। पुलिस को घाटलोदिया में एक व्यक्ति का शव मिला जिसकी मृत्यु सिर में गंभीर चोट लगने से हुई थी। पुलिस के अनुसार समझा जाता है कि मंगलवार रात संघर्ष में उसकी बुरी तरह पिटाई की गई।
सूरत में कई हिस्सों में आगजनी और पथराव की घटनाएं सामने आर्इं, जहां बड़ी संख्या में पटेल समुदाय के लोगों ने बंद कराया। मुख्यमंत्री आनंदीबेन ने गुजरात की जनता के लिए जारी एक वीडियो संदेश में कहा, ‘गुजरात में अर्द्धसैनिक बलों की कम से कम 53 कंपनियों को बुलाया गया है और कुछ समय बाद हम राज्य के कई हिस्सों में सेना को भी तैनात करेंगे। लेकिन हमें सोचना चाहिए कि सेना बुलाने की जरूरत क्यों आन पड़ी। गुजरात जैसे आदर्श राज्य में, जो कि शांति प्रिय राज्य है, वहां हमें बाहर से ऐसे बंदोबस्त करने पड़ रहे हैं। इससे क्या धारणा बनेगी। इसलिए मैं आपसे हाथ जोड़कर शांति बनाये रखने की अपील करती हूं’।
अमदाबाद-दिल्ली राजधानी एक्सप्रेस समेत कम से कम 12 ट्रेनें रद्द कर दी गई हैं और 19 ट्रेनों के मार्ग बदल दिए गए हैं। पश्चिम रेलवे के प्रवक्ता प्रदीप शर्मा ने बताया कि पांच और ट्रेनों को राज्य के बाहर से रास्ता बदलकर चलाया जा रहा है।
नगर पुलिस आयुक्त शिवानंद झा ने हिंसा की घटनाओं के बाद शहर के निकोल, बापूनगर, रामोल, ओधव, नरोदा, नारायणपुरा, कृष्णनगर, घाटलोदिया और वदाज समेत नौ इलाकों में कर्फ्यू लगा दिया। सूरत पुलिस नियंत्रण कक्ष के अधिकारियों ने बताया कि करीब 1000 लोगों की भीड़ ने शहर के उढणा इलाके में सूरत नगर निगम के दो गोदामों में आग लगा दी। मितेश सालुंके नाम के एक पुलिस अधिकारी उस समय गंभीर रूप से जख्मी हो गए जब मंगलवार रात शहर के लालगेट इलाके में हिंसा के दौरान भीड़ पथराव कर रही थी।
सौराष्ट्र क्षेत्र में राजकोट, जामनगर, भावनगर और पोरबंदर में बंद रहा। पुलिस के मुताबिक, बुधवार को बंद के दौरान सभी चार जिलों में छिटपुट हिंसा की घटनाओं की खबरें हैं। पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि राजकोट के पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) गगनदीप गंभीर उपलेटा मार्ग इलाके के पास हुए पथराव में घायल हो गए।
उत्तरी गुजरात के अधिकतर शहरों में बंद रहा, वहीं वड़ोदरा समेत मध्य गुजरात में बंद के आह्वान पर मिलीजुली प्रतिक्रिया देखने को मिली। आणंद में भी बंद का मिलाजुला असर रहा। विहिप नेता प्रवीण तोगड़िया ने आंदोलनकारियों से शांति की अपील की और पुलिस से भी धैर्य के साथ कार्रवाई करने का अनुरोध किया।
अमदाबाद शहर से हिंसा की 50 से अधिक घटनाएं सामने आर्इं, जिनमें बसों, पुलिस चौकियों और निजी वाहनों को आग के हवाले कर दिया गया, वहीं कुछ जगहों पर पुलिसवालों पर भी हमले किए गए।
हिंसा की जिम्मेदार पुलिस : हार्दिक
पटेल अनामत आंदोलन समिति के नेता 22 साल के हार्दिक ने हिंसा के लिए पुलिस को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि आने वाले दिनों में आंदोलन और तेज होगा। मंगलवार रात प्रदर्शनकारियों के हिंसा भड़काने के आरोपों को खारिज करते हुए हार्दिक ने पुलिस पर आरोप लगाया कि राजनीतिक तंत्र के इशारे पर आंदोलन को बाधित करने का प्रयास किया जा रहा है।
