Delhi Maujpur-Babarpur-Jafrabad Violence CAA Protest: दिल्ली से भाजपा सांसद गौतम गंभीर ने मंगलवार को दिल्ली में हुई हिंसा पर गुस्सा जाहिर किया। मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि हिंसा भड़काने और भड़काऊ भाषण देने में जो भी शामिल हों, चाहे वो कपिल मिश्रा हों या कोई और नेता, बिना पार्टी देखे उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए। गंभीर ने यह बात सोमवार को जाफराबाद और मौजपुरी में हुई सामुदायिक हिंसा के बाद कही। इन दोनों इलाकों में दो पक्षों के संघर्ष में 7 लोगों की मौत हो चुकी है। मृतकों में दिल्ली पुलिस का एक हेड कॉन्सटेबल भी शामिल है। इसके अलावा शहादरा डीसीपी अमित शर्मा भी मुठभेड़ के बीच फंसने के बाद घायल हो गए थे।

इससे पहले दिल्ली में हुई हिंसा को लेकर गंभीर ने सोमवार को भी नाराजगी जताई थी। उन्होंने ट्विटर पर लिखा था, ” नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान सीनियर पुलिस कॉन्सटेबल रतन लाल की मौत के बारे में सुनकर दुख हुआ। लेकतांत्रिक प्रदर्शनों में हिंसा की कोई जगह नहीं है। मैं सभी से शांति बनाए रखने की अपील करता हूं और दिल्ली पुलिस से मांग करता हूं कि वह दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई करे।”

जामिया में छात्रों पर हुए लाठीचार्ज के खिलाफ भी आवाज उठा चुके हैं गंभीर: क्रिकेटर से राजनेता बने गंभीर अब तक अपनी बेबाक राय के लिए जाने जाते हैं। कई बार उनके बयान पार्टी लाइन से अलग भी रहे हैं। दिसंबर में जब सीएए का विरोध कर रहे उपद्रवी छात्रों पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया था, तो गंभीर ने इसे गलत बताया था। हालांकि, उन्होंने अपने बयान को संतुलित करते हुए कहा था कि अगर कोई पत्थर फेंकेगा या सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाएगा तो पुलिस को कुछ जवाब तो देना ही पड़ेगा।

गंभीर के बयान में कपिल मिश्रा का नाम क्यों?: भाजपा नेता और पूर्व विधायक कपिल मिश्रा ने रविवार को मौजपुर में सीएए के समर्थन में बयान दिया था। उन्होंने दिल्ली पुलिस को खुलेआम चेतावनी दी थी कि अगर सीएए के खिलाफ प्रदर्शनकारियों को रास्ते से नहीं हटाया गया, तो वे लोग किसी की भी नहीं सुनेंगे। बताया जा रहा है कि कपिल मिश्रा के भाषण के आधे घंटे बाद ही मौजपुर में झड़प शुरू हो गई थी। हिंसा के बाद मिश्रा ने ट्वीट कर कहा था कि जब तक अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप भारत में हैं, हम इलाके को शांति से छोड़ रहे हैं। इसके बाद हम आपकी (पुलिस) की भी नहीं सुनेंगे।