टमाटर, प्याज, धनिया पत्ती के बाद अब लहसुन के दाम जेब पर असर डालने वाले हैं। हाल यह है कि खुदरा बाजार में लहसुन के दाम 400 रुपए प्रतिकिलो तक जा पहुंचे हैं, जबकि आनलाइन लहसुन के दाम 500 रुपए प्रतिकिलो के पार हो चुके हैं।

दरअसल अधिक बारिश के चलते लहसुन की फसल देश के कई राज्यों में खराब हो चुकी है। हाल यह है कि भारत इस समय लहसुन की आवक के लिए अफगानिस्तान पर निर्भर हो चुका है। बता दें कि एशिया की सबसे बड़ी मंडी में लहसुन की आवक राजस्थान, मध्यप्रदेश, हिमाचल प्रदेश व उत्तर प्रदेश से होती है। लेकिन इस साल बारिश ने कई सालों के रेकार्ड को तोड़ दिया, जिसे किसान भी भांप नहीं पाए और उनकी लहसुन की खड़ी फसल बर्बाद हो गई।

रोज पहुंच रही अफगानिस्तानी लहसुन

हालांकि हिमाचल के कुछ किसानों ने अपने लहसुन तोड़कर समय से ‘कोल्ड स्टोरेज’ में रख दिए थे, जो अब बेचने के लिए मंडी लाया जा रहा है। वहीं अफगानिस्तान से रोजाना मंडी 10-20 कंटेनर पहुंच रहे हैं। लेकिन जितने का माल नहीं हैस उससे ज्यादा की ‘कस्टम ड्यूटी’ उन्हें देनी पड़ रही है। जिसकी वजह चीनी लहसुन है (जिस पर भारत में रोक है ) जो गलत तरीके से बंगाल, उत्तर प्रदेश व नेपाल से सटे इलाकों से मंडी लाया जा रहा था।

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आजादपुर मंडी के ‘वेजिटेबल एसोसिएशन’ के महासचिव अनिल मल्होत्रा ने बताया कि जब चीनी लहसुन की शिकायतें हुईं तो कस्टम अधिकारियों ने अफगानिस्तान से आने वाले लहसुन पर भी सख्ती कर दी। जोकि पाकिस्तान के रास्ते अमृतसर होते हुए आजादपुर मंडी बेचने के लिए लाया जाता है। इसकी वजह से जितने का लहसुन वो बेचने के लिए भारत लेकर आते हैं उससे ज्यादा उन्हें बतौर गांरटी देना पड़ रहा है। हालांकि दस्तावेजों की जांच के बाद उन्हें उनका पैसा लौटा दिया जाता है। लेकिन भुगतान से पहले उनका लहसुन कई बार सड़ जाता है और खराब हो जाता है।