असम की राजधानी गुवाहाटी में बीते 25 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट के जज एसए बोबडे ने एक किताब ‘गुवाहाटी हाईकोर्ट, हिस्ट्री एंड हेरीटेज’ का लोकार्पण किया था। हाईकोर्ट के जज जो किताब लोकार्पण के दौरान मौजूद थे, ने अपने भाषण में बताया था कि इसमें एक ‘टिप्पणी’ है, जो कि एक दिलचस्प कहानी बयां कर रही है। वह कहानी यह है कि, “जब असम के पूर्व कानून मंत्री अब्दुल मुहीब मजमुदार ने असम के मुख्यमंत्री केसब गोगोई से पूछा था कि, ‘काश! उनका बेटा रंजन गोगोई भी राजनेता होते और प्रदेश का CM बनते?’ तब रंजन गोगोई गुवाहाटी में एक ‘तेजतर्रार वकील’ थे। इस पर केसब चंद्र गोगोई ने कहा था, ‘नहीं, उनका बेटा “राजनीति में शामिल नहीं होगा और इसलिए असम के मुख्यमंत्री नहीं होंगे। लेकिन उसके पास निश्चित रूप से भारत के मुख्य न्यायाधीश बनने की संभावना होगी।’
अब जब जस्टिस गोगोई भारत के मुख्य न्यायधीश बनने की राह पर हैं और उनके पिता की यह बात सत्य होती दिखाई दे रही है। उनके साथ के लोग उन्हें मजबूत और गहरे दृढ़ विश्वास के साथ कार्यवाही करने वाले व्यक्ति के रूप में बताते हैं। कहते हैं कि, “वे थोड़ा बोलते हैं लेकिन काम करते हैं।” पिछले कुछ वर्षों में गोगोई ने एक ऐसे न्यायाधीश के रूप में सम्मान प्राप्त किया, जो अपने दिमाग का उपयोग करते हैं और सभी प्रकार के संबंधों को सम्मान देते हैं। उन्होंने गुवाहाटी में एक साफ घर रखा। अपने साथियों को याद किया। उन्हें फूल लगा बगीचा काफी पसंद है। दक्षिण दिल्ली स्थित एक सरकारी दुकान से वे मछली खरीदते देखे गए थे। वे काम करने वाले व्यक्ति के रूप में जाने जाते हैं। उनके पास अपनी कोई कार नहीं है। उनकी मां शांति गोगोई, जो कि असम की एक प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता हैं, ने कामरूप जिले में स्थित एक पुराने घर को उनके नाम पर ट्रांसफर कर दिया। जस्टिस गोगोई सुप्रीम कोर्ट के अपने उन 11 सहयोगियों में शामिल हैं, जिन्होंने अपनी संपत्ति की जानकारी को सार्वजनिक किया था।
गौरतलब है कि जस्टिस रंजन गोगोई का जन्म वर्ष 1954 में हुआ था। वह वर्ष 1978 में बार काउंसिल के सदस्य बने थे। उन्होंने ने वर्ष 2001 के फरवरी महीने में गुवाहाटी हाईकोर्ट में नियमित जज के रूप में अपने कॅरियर की शुरूआत की थी। इसके बाद पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में वर्ष 2010 में उनका ट्रांसफर हो गया। वहां वे वर्ष 2011 में मुख्य न्यायाधीश बनें। 23 अप्रैल 2012 को वे सुप्रीम कोर्ट के जज बनें। इस साल जनवरी में सुप्रीम कोर्ट के चार वरिष्ठतम जजों ने प्रेस कांफ्रेंस कर सीजेआई दीपक मिश्रा के कामकाज के तौर-तरीकों पर गंभीर सवाल उठाए थे। इन 4 जजों में जस्टिस रंजन गोगोई भी शामिल थे। उनके अलावा जस्टिस जस्ती चेलामेश्वर (अब रिटायर), जस्टिस कुरियन जोसेफ और जस्टिस मदन बी. लोकुर ने भी सार्वजनिक तौर पर सीजेआई दीपक मिश्रा की आलोचना की थी। अब वे नार्थ-ईस्ट से आने वाले भारत के पहले मुख्य न्यायाधीश होंगे।
