जस्टिस सूर्य कांत ने सोमवार को भारत के 53वें प्रधान न्यायाधीश के तौर पर शपथ ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राष्ट्रपति भवन में एक समारोह में न्यायमूर्ति सूर्य कांत को शपथ दिलाई। उन्होंने हिंदी में शपथ ली। इस बीच पूर्व सीजेआई बीआर गवई ने नई मिसाल कायम करते हुए रिटायरमेंट के तुरंत बाद ही उन्हें मिली एक सरकारी सुविधा छोड़ दी।
पूर्व प्रधान न्यायाधीश बीआर गवई ने सोमवार को अपने उत्तराधिकारी न्यायमूर्ति सूर्य कांत के शपथ ग्रहण समारोह के बाद राष्ट्रपति भवन में उनके लिए आधिकारिक मर्सिडीज-बेंज कार छोड़कर एक नयी मिसाल कायम की। 23 नवंबर 2025 को सेवानिवृत्त हुए न्यायमूर्ति गवई आधिकारिक कार से राष्ट्रपति भवन पहुंचे और समारोह के बाद अपने निजी वाहन से रवाना हुए।
एक सूत्र ने बताया, ‘‘शपथ ग्रहण समारोह के बाद, न्यायमूर्ति गवई नए सीजेआई सूर्य कांत के लिए निर्धारित आधिकारिक वाहन को छोड़ गए और राष्ट्रपति भवन से दूसरी कार में लौटे ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि आधिकारिक कार नए सीजेआई के सुप्रीम कोर्ट जाने के लिए उपलब्ध रहे।’’
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भारत के 53वें प्रधान न्यायाधीश बने CJI सूर्य कांत
न्यायमूर्ति सूर्य कांत को न्यायमूर्ति बी आर गवई के स्थान पर न्यायपालिका के सर्वोच्च पद पर नियुक्त किया गया है। न्यायमूर्ति गवई रविवार को सेवानिवृत्त हो गए। न्यायमूर्ति सूर्य कांत को 30 अक्टूबर को अगला प्रधान न्यायाधीश नियुक्त किया गया था और वह लगभग 15 महीने तक इस पद पर रहेंगे। वह 9 फरवरी 2027 को 65 वर्ष की उम्र होने पर यह पद छोड़ देंगे। उपराष्ट्रपति सी पी राधाकृष्णन और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी समेत कई वरिष्ठ नेता इस समारोह में शामिल हुए। शपथ लेने के तुरंत बाद न्यायमूर्ति सूर्यकांत प्रधानमंत्री मोदी का अभिवादन करने उनके पास गए।
समारोह में राष्ट्रपति मुर्मू, उप राष्ट्रपति राधाकृष्णन, प्रधानमंत्री मोदी, प्रधान न्यायाधीश सूर्य कांत, पूर्व CJI गवई और कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल की एक तस्वीर भी खींची गई। इस दौरान पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ भी मौजूद थे और उन्होंने भी जस्टिस सूर्य कांत को बधाई दी।
हरियाणा के हिसार जिले में 10 फरवरी, 1962 को मध्यमवर्गीय परिवार में जन्मे जस्टिस सूर्य कांत एक छोटे शहर के वकील से देश के सर्वोच्च न्यायिक पद तक पहुंचे हैं। वह राष्ट्रीय महत्व और संवैधानिक मामलों के कई फैसलों और आदेशों का हिस्सा रहे। उन्हें कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से कानून में स्नातकोत्तर में ‘प्रथम श्रेणी में प्रथम’ स्थान प्राप्त करने का गौरव भी प्राप्त है। पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय में कई उल्लेखनीय फैसले देने वाले न्यायमूर्ति सूर्य कांत को 5 अक्टूबर, 2018 को हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया गया था। सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश के रूप में उनका कार्यकाल अनुच्छेद 370 के अधिकतर प्रावधानों को हटाने से जुड़े फैसले, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और नागरिकता के अधिकारों पर फैसले देने के लिए जाना जाता है।
(भाषा के इनपुट के साथ)
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