विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने शनिवार (29 सितंबर) को संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित करते हुए पाकिस्तान पर सीधा हमला बोला। सुषमा स्वराज ने पाकिस्तान के आतंक समर्थित चेहरे को संयुक्त राष्ट्र महासभा से उजागर किया। विदेश मंत्री ने कहा, ”9/11 का मास्टर माइंड तो मारा गया लेकिन 26/11 का मास्टरमाइंड हाफिज सईद आज भी खुला घूम रहा है, रैलियां करता है, चुनाव लड़वाता, सरेआम भारत को धमकियां देता है लेकिन एक बात संतोष की है कि दुनिया के देशों ने पाकिस्तान का सही चेहरा पहचान लिया है और इसीलिए एफएटीएफ ने टेरर फंडिंग के लिए आतंकवादियों को आर्थिक सहायता देने के लिए पाकिस्तान को निगरानी सूचि में रख दिया है।” वित्त मंत्री ने कहा, ”हमारे यहां आतंकवाद की चुनौती कहीं दूर देश से नहीं, बल्कि सीमा पार अपने पड़ोसी देश से ही आई है और वो देश केवल आतंकवाद फैलाने में ही माहिर नहीं है, बल्कि अपने किए हुए को नकारने में भी उसने महारत हासिल कर ली है। इसकी सबसे बड़ी मिसाल है ओसामा बिन लादेन का पाकिस्तान में पाया जाना।”
उन्होंने आगे कहा, “अमेरिका के इतिहास में 11 सितंबर 2001 की घटना सबसे बड़ी आतंकवादी घटना के रूप में देखी जाती है। इसीलिए उस घटना के मास्टर माइंड ओसामा बिन लादेन को अमेरिका अपना सबसे बड़ा दुश्मन मानता था और पूरी दुनिया में उसे खोज रहा था लेकिन उसे नहीं मालूम था कि खुद को अमेरिका का बहुत बड़ा दोस्त बताने वाले देश पाकिस्तान ने ही अपने यहां पनाह देकर उसे छिपा रखा था। ये अमेरिका के खुफिया तंत्र की सफलता है कि उन्होंने ओसामा को वहां खोज निकाला और यह अमेरिका की सैन्य शक्ति की उपलब्धि है कि उन्होंने उसे वहीं मार गिराया लेकिन पाकिस्तान की हिमाकत देखिए सारा सच सामने आ जाने के बाद भी न चेहरे पर झेप, न माथे पर शिकन.. जैसे कोई गुनाह उन्होंने किया ही न हो।”
#WATCH: EAM Sushma Swaraj says at #UNGA, "9/11 ka mastermind to maara gaya, kintu 26/11 ka mastermind Hafiz Saeed aaj bhi khula ghum raha hai. Ralliyan karta hai, chunav ladwata hai, sareaam Bharat ko dhamkiya deta hai" pic.twitter.com/wkn5OOColn
— ANI (@ANI) September 29, 2018
भारत की पाकिस्तान से बातचीत क्यों नहीं होती इसपर विदेश मंत्री ने कहा, ”हमारा तो मानना है कि दुनिया के जटिल से जटिल मुद्दे केवल बातचीत से ही सुलझाए जा सकते हैं और सुलझाए जाने चाहिए, इसीलिए पाकिस्तान के साथ अनेक बार वार्ता शुरू की गई है, वार्ताओं के अनेक दौर भी चले हैं लेकिन हर बार उनकी हरकतों के कारण ही वार्ता रुकी है। भारत में अनेक राजनैतिक दलों की सरकार केंद्र में बनी है, हर सरकार ने यह कोशिश की कि बातचीत के द्वारा हमारे विवाद सुलझ जाएं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने तो अपने शपथ ग्रहण समारोह के पहले ही सार्क के सभी नेताओं को आमंत्रित करके सरकार बनने से पहले ये शुरुआत कर दी थी।
#WATCH: EAM Sushma Swaraj in her address at #UNGA reacts on meeting between her and Pakistan foreign minister on the sidelines of UNGA called off by India pic.twitter.com/lobY7BKLWj
— ANI (@ANI) September 29, 2018
9 दिसंबर 2016 को स्वयं मैंने इस्लामाबाद जाकर कॉम्प्रीहैंसिंव बायलेट्रल डायलॉग की शुरुआत कर दी थी किन्तु मात्र तीन हफ्ते बाद दो जनवरी की रात को पठानकोट एयरबेस पर हमला कर दिया गया, आप ही बताएं अध्यक्ष जी उस माहौल में बातचीत आगे कैस बढ़ सकती थी? अभी भी पाकिस्तान में नई सरकार आने के बाद वहां के प्रधानमंत्री इमरान खान ने प्रधानमंत्री मोदी को पत्र लिखकर इच्छा जताई कि न्यूयॉर्क में दोनों देशों के विदेश मंत्रियों की अगर मुलाकात हो जाए तो अच्छा होगा। हमने उनका प्रस्ताव मंजूर किया लेकिन चंद घंटों बाद ही…चंद घंटों बाद ही यह खबर आई कि जम्मू और कश्मीर पुलिस के तीन जवानों का पहले अपहरण किया और बाद में उन्हें मारकर फेंक दिया, क्या ये हरकतें बातचीत की नीयत को दर्शाती हैं?”
