महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे विधानमंडल के किसी भी सदन के सदस्य नहीं हैं। बावजूद उन्होंने पहली बार राज्य की सत्ता की बागडोर संभाली है। अब तक वो शिवसेना की कमान संभालते रहे हैं लेकिन अब उन्हें सरकार और संगठन दोनों को संभालना है। ऐसे में उनके ऊपर जिम्मेदारियां बढ़ गई हैं। उद्धव ने इसके लिए अपने विश्वस्तों की एक कोर कमेटी बनाई है, जो उन्हें सरकार और संगठन के बीच कामकाज करने में सहयोग करेंगे। इतना ही नहीं तीन दलों की साझा सरकार में गठबंधन सहयोगियों के बीच भी ये टीम सेतुबंध का काम करेगी। इन चेहरों में सीएम के बेटे आदित्य ठाकरे, पार्टी विधायक दल के नेता चुने गए एकनाथ शिंदे, शिवसेना नेता सुभाष देसाई, पार्टी प्रवक्ता संजय राउत और पार्टी के सचिव मिलिंद नारवेकर शामिल हैं।
आदित्य ठाकरे: आदित्य पहली बार विधान सभा पहुंचे हैं। वो ठाकरे परिवार के पहले ऐसे शख्स हैं जिन्होंने पहली बार विधान सभा चुनाव लड़ा है। वर्ली से शिवसेना के विधायक आदित्य इससे पहले सेना के युवा विंग का कामकाज संभालते रहे हैं। चुनावों से पहले उन्होंने राज्यभर की यात्राएं की थीं और संगठन को मजबूत किया था। आदित्य पिता को सलाह देते रहे हैं। राज्य में सिंगल यूज प्लास्टिक पर बैन लगाने का सुझाव आदित्य का ही था। मौजूदा सरकार में भी वो सीएम पिता के सलाहकार के तौर पर देखे जा सकते हैं। पिता की गैर मौजूदगी में आदित्य पार्टी का कामकाज देख सकते हैं।
मिलिंद नारवेकर: शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे के नजदीकी लोगों में से एक मिलिंद नारवेकर को भी अहम जिम्मेदारी सौंपी गई है। तीन दलों के बीच गठबंधन करने और सरकार बनाने में नारवेकर ने अहम भूमिका निभाई है। वो शिव सेना में सचिव का पद संभाल रहे हैं लेकिन अब उन्हें मुख्यमंत्री कार्यालय में ऑफिसर ऑन स्पेशल ड्यूटी (ओएसडी) बनाया गया है। पिछले 25 सालों से उद्धव के साथ रहने वाले नारवेकर को क्राइसिस मैनेजर कहा जाता है। विभिन्न दलों में नेताओं से उनके अच्छे रिश्ते हैं। सोनिया गांधी से उद्धव ठाकरे की बातचीत को नारवेकर ने ही सफल बनाया था। उन्होंने गठबंधन को मूर्त रूप देने के लिए दिल्ली में डेरा डाला और अहमद पटेल के सहारे सोनिया तक पहुंचे। मुंबई के एक होटल में शरद पवार के साथ उद्धव की मीटिंग इन्होंने ही फिक्स कराई थी।
एकनाथ शिंदे: चुनाव नतीजों के बाद शिवसेना विधायकों की पहली बैठक में एकनाथ शिंदे को ही विधायक दल का नेता चुना गया था। शिंदे उद्धव सरकार में मंत्री बनाए गए हैं। उन्हें सरकार के कामकाज और विधानसभा में फ्लोर मैनेजमेंट का काम सौंपा गया है। पार्टी के अंदर भी शिंदे की बात को खास तवज्जो दी जाती रही है। पार्टी कैडर को संभालने की जिम्मेदारी एकनाथ शिंदे के कंधों पर ही है।
सुभाष देसाई: देसाई उन छह मंत्रियों में शामिल हैं, जिन्होंने उद्धव ठाकरे के साथ शपथ ग्रहण किया है। वो महाराष्ट्र विधान परिषद के सदस्य हैं। इससे पहले वो गोरेगांव से तीन बार विधायक रहे हैं। 77 साल के देसाई उद्धव ठाकरे के विश्वस्त लोगों में शामिल हैं। पिछली सरकार में ये उद्योग मंत्री रह चुके हैं। मौजूदा समय में देसाई सीएम उद्धव ठाकरे को गवर्नेंस और पॉलिसी से संबंधित मुद्दों पर सुझाव देंगे। इसके अलावा सीएम की गैर मौजूदगी या उनके प्रतिनिधि के तौर पर देसाई को अलग-अलग समारोहों को संबोधित करने और प्रतिनिधिमंडल से बातचीत की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
संजय राउत: शिव सेना के मुखपत्र सामना के कार्यकारी संपादक राउत राज्यसभा सांसद हैं। मौजूदा सरकार गठन की प्रक्रिया और तीन दलों के गठबंधन खासकर एनसीपी से दोस्ती कराने में संजय राउत ने अहम भूमिका निभाई है। गठबंधन सरकार में भी शिवसेना और एनसीपी के बीच रिश्ते सामान्य रखने की जिम्मेदारी राउत को सौंपी गई है। संजय राउत दिल्ली में रहकर सेना के अन्य दलों के साथ रिश्तों में गरमी बनाए रखते रहे हैं। इसके अलावा वो विभिन्न मुद्दों पर संपादकीय लिख उद्धव ठाकरे के फैसलों को सही ठहराते रहे हैं।
