लोकसभा में भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने सोमवार को उनके द्वारा जीडीपी के बारे में दिये गए बयान को लेकर सोशल मीडिया पर अभद्र भाषा का इस्तेमाल किए जाने का मुद्दा उठाया। बीजेपी सांसद ने सोशल मीडिया पर ऐसी गतिविधियों पर रोक लगाने के लिये कानून बनाने की मांग की । शून्यकाल में इस विषय को उठाते हुए दूबे ने कहा, ‘‘सोमवार को मैंने एक विशेषज्ञ को उद्धृत करते हुए जीडीपी के संबंध में कुछ बातें कही थीं। जिसको जीडीपी मानना है, जीडीपी माने, जिसको हैप्पीनेस इंडेक्स मानना है, वह हैप्पीनेस इंडेक्स माने। जिसको गांव, गरीब को मानना है, वह गांव गरीब को माने और जिसको अमेरिका को मानना है, वह अमेरिका को माने।’’

उन्होंने कहा कि उन्होंने सभी बातें तर्क के साथ रखी थीं, लेकिन मीडिया, खासकर सोशल मीडिया पर उनकी बात के संदर्भ में उनके परिवार के प्रति अभद्र शब्दों का इस्तेमाल किया गया। दुबे ने कहा कि उनका सरकार से आग्रह है कि सदन में बोलने के संदर्भ में इस प्रकार की जो घटनाएं होती है, ऐसे में सोशल मीडिया पर ऐसी गतिविधि पर रोक लगाने के लिये कानून बने।

बलिया से भाजपा सांसद वीरेन्द्र सिंह ने दुबे का समर्थन करते हुए कहा कि वह गांव से हैं, किसान है। जीडीपी को नहीं मानते हैं । उन्होंने कहा कि जीडीपी हमारे गांव, किसान का पैमाना तय नहीं कर सकती। भाजपा की जसकौर मीणा ने पिछड़े वर्गो के संबंध में क्रीमी लेयर का मुद्दा उठाया और उनके हितों की सुरक्षा करने की मांग की। वहीं, भाजपा के अजय निषाद ने नीलगाय, जंगली सुअर एवं अन्य जानवरों द्वारा फसलों को नुकसान किए जाने का मुद्दा उठाया और सरकार से किसानों के हित में फसलों को सुरक्षित बनाने के लिए कदम उठाने की मांग की।