पश्चिम बंगाल की राजनीति में ईडी रेड ने सियासी तापमान बढ़ा दिया है। जब से आईपैक कंपनी पर छापा पड़ा है, टीएमसी और बीजेपी के बीच में आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। अब इस बीच जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है, आईपेक कंपनी को लेकर भी कई खुलासे हो रहे हैं। जनसत्ता के सहयोगी इंडियन एक्सप्रेस ने भी इस मामले में पड़ताल की है और कुछ अहम जानकारी हासिल की है। पता चला है कि एक कंपनी से 2021 में आईपैक को 13.50 करोड़ का लोन जरूर मिला था, लेकिन वो कंपनी आधिकारिक रिकॉर्ड्स में कभी थी ही नहीं।
जब ROC की फाइडिंग की समीक्षा की गई तो पता चला कि आईपैक ने 17 दिसंबर 2021 को क्रेडिटर्स की लिस्ट जारी की थी, इसके अलावा जानकारी दी थी कि उसे Ramasetu Infrastructure India (P) Limited’ नाम की कंपनी से 13.50 करोड़ का चंदा मिला था। उस कंपनी का पता भी लिखा था- तीसरी मंज़िल, अशोका प्लाज़ा, दिल्ली रोड, रोहतक, हरियाणा। लेकिन इंडियन एक्सप्रेस जब उस पते पर पहुंचा तो कोई कंपनी इस नाम से वहां थी ही नहीं।
थोड़ी और पड़ताल की तो पता चला कि 27 जून 2025 को आईपैक ने बताया कि उसने 13.50 करोड़ रुपये में से एक करोड़ रुपये चुका दिए थे और 12.50 करोड़ रुपये देना बाकी था। इस कर्ज को लेकर इंडियन एक्सप्रेस ने आईपैक के सह संस्थापक और निदेशक प्रतीक जैन से सवाल पूछा, लेकि सामने से कोई जवाब नहीं आया। सवाल तो आईपैक की फरीदाबाद स्थित चार्टर्ड अकाउंटेंट पूनम चौधरी से भी पूछा गया, लेकिन उन्होंने भी चुप्पी साध ली।
वैसे ROC के दस्तावेज यह भी बताते हैं कि रामसेतु इंफ्रास्ट्रक्चर इंडिया प्राइवेट लिमिटेड को कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 248(1) के तहत भंग कर दिया गया था। ऐसा नियम है कि जिस कंपनी का काम शुरू नहीं हो पाता है और संचालन भी दो सालों तक बंद रहता है, उन्हें रजिस्टर से हटाया जा सकता है। बड़ी बात यह भी है कि ROC रिकॉर्ड में केवल ‘रामसेतु इंफ्रास्ट्रक्चर इंडिया प्राइवेट लिमिटेड’ के ही इन्कॉरपोरेशन से जुड़े दस्तावेज़ उपलब्ध हैं, न कि I-PAC द्वारा घोषित ‘रामासेतु इंफ्रास्ट्रक्चर इंडिया लिमिटेड’ के।
जांच में ये भी पता चला कि विक्रम मुंजाल (रोहतक), संदीप राणा (हिसार), विजेंदर (जींद), बलजीत जांगड़ा (हिसार), प्रदीप कुमार (हिसार) और जगबीर सिंह रामसेतु इंफ्रास्ट्रक्चर इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के गठन के समय शेयर होल्डर्स थे। इन सभी से इंडियन एक्सप्रेस ने संपर्क किया, लेकिन उन्हें ऐसे किसी लोन की जानकारी नहीं थी जो कभी आईपैक को दिया गया हो।
ROC में दाख़िल दस्तावेज़ों के मुताबिक I-PAC का गठन 13 अप्रैल 2015 को पटना में किया गया था और फरवरी 2022 में इसका पंजीकृत कार्यालय कोलकाता स्थानांतरित किया गया। कंपनी के निदेशक और शेयरधारक- प्रतीक जैन, ऋषिराज सिंह और विनेश चंदेल स्थापना के समय से चल रहे हैं।
