भगोड़े शराब कारोबारी विजय माल्या और वित्त मंत्री अरुण जेटली के बीच हुई मुलाकात के विवाद के बीच पूर्व अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने कहा है कि हो सकता है कि किसी के इशारे पर विजय माल्या लंदन भागा हो। ‘द टेलीग्राफ’ से बातचीत में रोहतगी ने कहा कि हो सकता है कि किसी ने माल्या को यह बताया हो कि आपके खिलाफ 9000 करोड़ रुपये के बैंक कर्ज का मामला अब ऋण वसूली न्यायाधिकरण में जा रहा है और यह जानकर माल्या लंदन भाग गया हो। हालांकि, पूर्व अटॉर्नी जनरल ने जेटली और माल्या की मुलाकात के बारे में किसी तरह की जानकारी होने से इनकार किया लेकिन उनके इस खुलासे से विवाद और गहरा गया है। बता दें कि मुकुल रोहतगी जून 2014 से जून 2017 तक अटॉर्नी जनरल थे।
मामले में तारीख दर तारीख हुई घटनाओं पर नजर डालें तो पूर्व अटॉर्नी जनरल के खुलासे माल्या के भागने में बड़ी साजिश की ओर इशारा करता है। वैसे तो विजय माल्या ने यह नहीं बताया है कि उसने कब अरुण जेटली से संसद में मुलाकात की थी लेकिन कांग्रेस सांसद पीएल पुनिया के मुताबिक उन्होंने उन दोनों को एक मार्च 2016 को संसद के सेंट्रल हॉल में मिलते हुए देखा था। इसके अगले ही दिन यानी 2 मार्च, 2016 को बैंकों ने 9000 करोड़ का लोन वसूली के लिए बेंगलुरु स्थित ऋण वसूली न्यायाधिकरण का दरवाजा खटखटाया और उसी दिन विजय माल्या लंदन फरार हो गया। माल्या ने कहा है कि उन्होंने लंदन जाने की सूचना वित्त मंत्री को दे दी थी। इसके एक सप्ताह बाद 8 मार्च, 2016 को बैंकों के समूह ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया और गुहार लगाई कि माल्या का पासपोर्ट रद्द किया जाए।
भारत सरकार विजय माल्या के प्रत्यर्पण की कोशिश कर रही है। इस सिलसिले में लंदन की वेन्समिन्स्टर कोर्ट में सुनवाई हो रही है। अदालत अब 10 दिसंबर को माल्या के प्रत्यर्पण पर फैसला सुनाएगी लेकिन 13 सितंबर को तारीख पर आए माल्या ने यह कहकर सनसनी मचा दी कि लंदन आने से पहले उन्होंने वित्त मंत्री को मिलकर बता दिया था। माल्या ने यह भी दावा किया था कि उन्होंने मामले को सलटाने के लिए वित्त मंत्री से हस्तक्षेप की गुहार लगाई थी। माल्या के इस खुलासे के बाद जेटली विवादों में हैं। हालांकि, उन्होंने संसद में माल्या से मुलाकात की बात कबूल की है लेकिन मामला सलटाने की बात को झूठा करार दिया है।

