नीति आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की ओर से न्यूनतम आय गारंटी योजना की आलोचना की थी। मंगलवार (26 मार्च) को चुनाव आयोग ने एक चिट्ठी लिख कुमार से इस बारे में स्पष्टीकरण मांगा है। 20 प्रतिशत गरीब घरों को 6,000 रुपये की न्यूनतम आय देने के कांग्रेस के वादे को खारिज करते हुए कुमार ने कहा था कि पार्टी “चुनाव जीतने के लिए कुछ भी कह और कर सकती है।” न्यूज एजंसी ANI से कुमार ने कहा था कि प्रस्तावित न्यूनतम आय योजना (NYAY) से राजकोषीय घाटा बढ़ेगा।
चुनाव आचार संहिता के तहत सत्ताधारी पार्टी के हित में “सरकारी गाड़ियों, मशीनरी और कर्मचारियों के इस्तेमाल” पर पाबंदी होती है। 10 मार्च को लोकसभा चुनाव के ऐलान के साथ ही आचार संहिता लागू हो गई। इसका उद्देश्य चुनाव के दौरान सभी राजनैतिक दलों और उम्मीदवारों के लिए एक-समान व्यवस्था लागू करना है। चुनाव आयोग के एक सूत्र ने कहा, “वह एक सरकारी कर्मचारी हैं और आदर्श स्थिति में उन्हें ऐसा बयान नहीं देना चाहिए जो भाजपा को फायदा पहुंचाने की दिशा में देखा जा रहा है। उनसे जवाब मांगा गया है।” कुमार को जवाब देने के लिए दो दिन का वक्त दिया गया है।
कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने सोमवार (25 मार्च) को ऐलान किया था कि उनकी पार्टी की सरकार बनने पर देश के हर गरीब परिवार को सालाना 72 हजार रुपये दिए जायंगे। गांधी ने इसे गरीबी पर ‘आखिरी प्रहार’ करार देते हुए कहा था कि इससे देश के पांच करोड़ परिवारों यानी 25 करोड़ लोगों को गरीबी से बाहर निकाला जा सकेगा। इस योजना से देश के खजाने पर करीब 3,60,000 करोड़ रुपये सालाना का बोझ पड़ने की संभावना है।
इस ऐलान के बाद ANI से कुमार ने कहा था, “यह कांग्रेस का पुराना तरीका है। वे चुनाव जीतने के लिए कुछ भी कह और कर देते हैं। 1966 में गरीबी हटा दी गई थी, वन रैंक वन पेंशन लागू हो गया था, सबको शिक्षा के अधिकार के तहत शिक्षा मिल रही थी! तो आप देखते हैं कि वो कुछ भी बोल और कर सकते हैं।”
