दिल्ली के परिवहन और पर्यावरण मंत्री तथा आम आदमी पार्टी के नेता कैलाश गहलोत शनिवार को प्रवर्तन निदेशालय (ED) के दफ्तर पहुंचे। उन्हें ईडी ने समन जारी कर पूछताछ के लिए बुलाया था। दिल्ली के कथित शराब घोटाले और मनी लांड्रिंग मामले में ईडी उनसे कुछ सवालों की जानकारी चाहती है। इस मामले में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पहले ही गिरफ्तार हो चुके हैं और इस समय ईडी की हिरासत में हैं। उनसे पहले दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह भी गिरफ्तार हो चुके हैं।

दिल्ली सरकार में परिवहन, गृह और कानून मंत्री हैं गहलोत

नजफगढ़ से आम आदमी पार्टी (AAP) के विधायक गहलोत (49) मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली दिल्ली सरकार में परिवहन, गृह और कानून मंत्री हैं। कैलाश गहलोत ने ही विवादास्पद आबकारी नीति का ड्राफ्ट तैयार किया था। सूत्रों ने कहा कि गहलोत को मामले में पूछताछ के लिए उपस्थित होने और धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत अपना बयान दर्ज कराने के लिए कहा गया है।

सीएम केजरीवाल, सिसोदिया और संजय सिंह हो चुके हैं गिरफ्तार

यह मामला 2021-22 के लिए दिल्ली सरकार की आबकारी नीति को तैयार करने और क्रियान्वित करने में कथित भ्रष्टाचार और धन शोधन से जुड़ा है। दिल्ली सरकार की विवादित आबकारी नीति को बाद में रद्द कर दिया गया था। इस मामले में आप नेता मनीष सिसोदिया और संजय सिंह को ईडी ने पहले गिरफ्तार किया था और वे न्यायिक हिरासत में हैं। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को ईडी ने धनशोधन मामले में 21 मार्च को गिरफ्तार किया था और गुरुवार को एक अदालत ने ईडी की उनकी हिरासत एक अप्रैल तक बढ़ा दी।

ईडी कैलाश गहलोत से नीति के निर्माण के संबंध में पूछताछ की जा सकती है, क्योंकि वह 2021-22 के लिए नई शराब नीति की तैयारी और कार्यान्वयन के लिए पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और पूर्व शहरी विकास मंत्री सत्येंद्र जैन के साथ मंत्रियों के समूह का हिस्सा थे। एजेंसी ने अपने आरोपपत्र में गहलोत के नाम का उल्लेख किया था।

मामले में पहले गिरफ्तार किए गए आप संचार प्रभारी विजय नायर के संदर्भ में ईडी ने कहा था कि नायर गहलोत को आवंटित सरकारी बंगले में रहते थे। गहलोत दक्षिण पश्चिम दिल्ली के नजफगढ़ में रहते हैं। किसी लोक सेवक द्वारा किसी अन्य को सरकारी आवास का उपयोग करने की अनुमति दिए जाने को आपराधिक विश्वासघात बताते हुए ईडी ने केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से इस मामले में कार्रवाई करने को कहा था।

यह मामला 2021-22 के लिए दिल्ली सरकार की आबकारी नीति को तैयार करने और क्रियान्वित करने में कथित भ्रष्टाचार और धन शोधन से जुड़ा है। दिल्ली सरकार की विवादित आबकारी नीति को बाद में रद्द कर दिया गया था। दिल्ली के उपराज्यपाल वी के सक्सेना ने शराब नीति के निर्माण और कार्यान्वयन में कथित अनियमितताओं की सीबीआई जांच की सिफारिश की। इसके बाद ईडी ने धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत मामला दर्ज किया।