Mohan Bhagwat News: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भगवत ने शुक्रवार को जोर देकर कहा कि भारतीय जनता पार्टी, विश्व हिंदू परिषद और विद्या भारती जैसे संगठन स्वतंत्र रूप से काम करते हैं और वह संघ द्वारा कंट्रोल नहीं होते हैं। उन्होंने कहा कि संघ कोई पैरामिलिट्री ऑर्गेनाइजेशन नहीं है और भारतीय जनता पार्टी को देखकर आरएसएस के बारे में निष्कर्ष निकालने की कोशिश करना एक बड़ी भूल होगी।

भोपाल में एक सभा को संबोधित करते हुए आरएसएस चीफ मोहन भागवत ने कहा, “हम वर्दी पहनते हैं, पथ संचलन करते हैं और दंड अभ्यास करते हैं। लेकिन अगर कोई इसे अर्धसैनिक संगठन समझता है तो यह भूल होगी। उन्होंने कहा कि संघ एक अनूठा संगठन है, जिसे समझना आसान नहीं है। भागवत ने कहा, ‘‘अगर आप बीजेपी को देखकर संघ को समझना चाहते हैं तो यह बहुत बड़ी गलती होगी। यही गलती तब भी होगी, जब आप विद्या भारती को देखकर संघ को समझने की कोशिश करेंगे।’’

संघ के खिलाफ झूठा नैरेटिव गढ़ा जा रहा- भागवत

भागवत ने कहा कि संघ के खिलाफ एक झूठा नैरेटिव गढ़ा जा रहा है। उन्होंने कहा, “आजकल लोग सही जानकारी के लिए गहराई में नहीं जाते। वे सोर्स तक नहीं पहुंचते, बल्कि विकिपीडिया देख लेते हैं। वहां सब कुछ सही नहीं होता। जो भरोसेमंद सोर्स तक जाएंगे, उन्हें संघ के बारे में सही जानकारी मिलेगी।’’

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आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि इन्हीं भ्रांतियों के कारण संघ की भूमिका और उद्देश्य को साफ करना बहुत जरूरी हो गया है। मोहन भागवत ने कहा, ‘‘संघ किसी प्रतिक्रिया या विरोध में नहीं बना है। संघ किसी से प्रतिस्पर्धा भी नहीं करता।’’ भागवत ने कहा कि अंग्रेज भारत पर आक्रमण करने वाले पहले लोग नहीं थे। उन्होंने कहा कि बार-बार दूर-दराज से आए कुछ गिने-चुने लोग, जो भारतीयों से हर दृष्टि से कमजोर थे, उन्होंने हमें पराजित किया। उन्होंने कहा, ‘‘वे न तो हम जैसे समृद्ध थे और न ही हम जैसे सदाचारी। देश की बारीकियों को जाने बिना भी वे हमारे घर में हमें हराते रहे। ऐसा सात बार हुआ और अंग्रेज आठवें आक्रांता थे। तब सवाल उठता है कि आजादी की गारंटी क्या है? हमें यह सोचने की जरूरत है कि ऐसा बार-बार क्यों हुआ।’’

भागवत ने कहा कि समाज को खुद को समझते हुए स्वार्थ से ऊपर उठना होगा। उनके अनुसार, अगर समाज गुणों और मूल्यों के साथ एकजुट होकर खड़ा होता है तो देश का भविष्य निश्चित रूप से बेहतर होगा। भागवत ने कहा कि संघ की वित्तीय स्थिति अब ठीक है और वह किसी बाहरी धन या चंदे पर निर्भर नहीं है। उन्होंने पिछले 100 वर्षों में संगठन द्वारा झेली गई आर्थिक कठिनाइयों को भी याद किया।

संघ को समझने के लिए शाखा में आएं- मोहन भागवत

अपने संबोधन के अंत में भागवत ने लोगों से संघ को बेहतर ढंग से समझने के लिए किसी ‘शाखा’ में आने की अपील की। उन्होंने कहा, “मैंने संघ के बारे में अपने विचार रखे हैं। समझना है तो भीतर आकर समझिए। अगर मेरी बातों पर भी पूरा विश्वास न हो तो कोई बात नहीं। सबसे अच्छा तरीका है कि अंदर आकर संघ को समझा जाए। अगर मैं दो घंटे यह समझाऊं कि चीनी कितनी मीठी होती है, तो भी बात नहीं बनेगी। एक चम्मच चीनी चख लीजिए, खुद समझ में आ जाएगा।’’

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