अमेरिकी वाणिज्य सचिव हॉवर्ड लटनिक द्वारा व्यापार समझौते में देरी के लिए भारत को सार्वजनिक रूप से जिम्मेदार ठहराने के कुछ दिनों बाद, अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने दिल्ली में साफ तौर पर सुलह का रुख अपनाया। ट्रेड नेगोशिएटर की मंगलवार को ही बैठक होने की घोषणा करके और भारत को पैक्स सिलिका में आमंत्रित किए जाने की पुष्टि करके गोर ने भारत को आश्वस्त करने की कोशिश की कि वाशिंगटन बिगड़े संबंधों को सुधारने के लिए प्रतिबद्ध है।

गोर ने अपने पहले दिन दिए गए बयान में चार बिंदुओं पर ज्यादा जोर दिया। इसमें भारत के साथ उनका व्यक्तिगत संबंध, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से उनकी नजदीकी और उन पर भरोसा, ट्रंप-मोदी संबंधों और साझेदारी को स्थिर करने और जनभावनाओं को संबोधित करने के लिए निरंतर, कदमों की जरूरत शामिल है।

ट्रंप के दूसरे कार्यकाल की पहली वर्षगांठ से कुछ दिन पहले पहुंचे गोर ने भारत-अमेरिका संबंधों को इस सदी की सबसे महत्वपूर्ण वैश्विक साझेदारी बताया। उन्होंने कहा कि भारत से ज्यादा जरूरी कोई साझेदार नहीं हैं। साथ ही एक एजेंडा पेश किया। उन्होंने भारत को दुनिया के सबसे पुराने लोकतंत्र और विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र का संगम बताया।

गोर ने अपनी पिछली यात्राओं को याद किया

2013 में ताजमहल, रणथंभोर, जयपुर और पंजाब की अपनी यात्रा को याद करते हुए, गोर ने भारत के मिलनसार लोगों, रंगों, अविश्वसनीय इतिहास और भावना की बात की। गोर की कोशिशों का एक अहम हिस्सा वांशिगटन में उनकी प्रतिष्ठा को बनाए रखने में सहायक रहा है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि राष्ट्रपति ट्रंप ने उन्हें व्यक्तिगत रूप से चुना है और उन्हें ओवल ऑफिस तक सीधी पहुंच हासिल है। उन्होंने बताया कि कैसे ट्रंप ने उन्हें चुना था और यह दिखाने की कोशिश की थी कि उन्हें अमेरिकी राष्ट्रपति का भरोसा हासिल है।

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उन्होंने कहा, “मैं पिछले हफ्ते राष्ट्रपति के साथ था और नए साल के ठीक बाद जब हम रात का खाना खा रहे थे, तो उन्होंने भारत यात्रा के अपने अविश्वसनीय अनुभव और भारत के महान प्रधानमंत्री मोदी के साथ अपनी गहरी मित्रता के बारे में बताया। मुझे आशा है कि राष्ट्रपति जल्द ही, संभवतः अगले एक-दो सालों में, हमारे यहां आएंगे।”

ट्रंप को गोर ने दिया धन्यवाद

राष्ट्रपति को अपना प्रिय दोस्त बताते हुए उन्होंने कहा, “मैं राष्ट्रपति ट्रंप को मुझ पर एक बार फिर से भरोसा जताने के लिए धन्यवाद देना चाहता हूं। मैं राष्ट्रपति को अपना प्रिय मित्र मानता हूं।” इस बात की पुष्टि करते हुए हुए गोर ने बताया कि उनका अमेरिकी राष्ट्रपति से सीधा संपर्क है। उन्होंने कहा, “जब मुझे यह पद मिला, तो व्हाइट हाउस में किसी ने मुझसे पूछा, ‘आप राष्ट्रपति से कैसे संपर्क में रहेंगे?’ और दिलचस्प बात यह है कि राष्ट्रपति को सुबह दो बजे फोन करने की आदत है। इसलिए, नई दिल्ली में समय के अंतर को देखते हुए, यह तरीका काफी कारगर साबित हो सकता है।”

कम से कम तीन मौकों पर, गोर ने ट्रंप और मोदी के बीच की दोस्ती का जिक्र किया। गोर ने कहा, “मैंने राष्ट्रपति ट्रंप के साथ पूरी दुनिया की यात्रा की है और मैं इस बात की पुष्टि कर सकता हूं कि प्रधानमंत्री मोदी के साथ उनकी दोस्ती सच्ची है। अमेरिका और भारत न केवल साझा हितों से बंधे हैं, बल्कि उनके बीच मजबूत संबंध हैं।”

दो मुद्दों पर ज्यादा फोकस किया

सबसे खास बात यह है कि गोर ने टकराव के दो अहम फोकस किया। पहला तो ट्रेड डील और दूसरा पैक्स सिलिका से भारत का बहिष्कार। उन्होंने कहा, “सच्चे दोस्त आपस में असहमत हो सकते हैं, लेकिन अंत में हमेशा अपने मतभेद सुलझा लेते हैं। आपमें से कई लोगों ने मुझसे चल रही ट्रेड डील की बातचीत के बारे में जानकारी मांगी है। दोनों पक्ष सक्रिय रूप से बातचीत में लगे हुए हैं। दरअसल, ट्रेड पर अगली बैठक कल होगी। याद रखिए, भारत दुनिया का सबसे बड़ा देश है, इसलिए इस समझौते को अंतिम रूप देना आसान काम नहीं है, लेकिन हम इसे पूरा करने के लिए दृढ़ संकल्पित हैं और यद्यपि व्यापार हमारे संबंधों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।”

उन्होंने यह भी घोषणा की है कि भारत को अगले महीने एआई और सिलिकॉन सप्लाई चेन पर पैक्स सिलिका में पूर्ण सदस्य के तौर पर शामिल होने के लिए आमंत्रित किया जाएगा। उन्होंने कहा, “जैसे-जैसे दुनिया नई तकनीक को अपना रही है, यह आवश्यक है कि भारत और अमेरिका इस पहल की शुरुआत से ही मिलकर काम करें।”

गोर को माना जाता है ट्रंप का वफादार

आखिर में गोर ने लोगों से संपर्क साधा। उन्होंने कहा, “भारत की जनता ने मेरा बहुत गर्मजोशी से स्वागत किया, इसके लिए मैं उनका आभारी हूं। आप एक जुझारू राष्ट्र हैं। आप आध्यात्मिक हैं। इस अद्भुत राष्ट्र की यात्रा के दौरान आपमें से कई लोगों से मिलने की मुझे आशा है।” दूतावास की ओर से भी भविष्य की ओर देखने का मैसेज था। गोर को अक्सर ट्रंप का वफादार कहा जाता है। उन्होंने कहा, “दूतावास के कर्मचारियों के साथ काम करने के लिए मैं उत्साहित हूं। आपके और मेरे पास कूटनीति को फिर से परिभाषित करने का एक अविश्वसनीय, जीवन में एक बार मिलने वाला अवसर है।”

सबसे खास बात यह है कि कि गोर का सार्वजनिक बयान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को औपचारिक क्रेडेशिंयल पेश करने से पहले आया है। एक तरह से, गोर पहले ही प्रोटोकॉल का उल्लंघन कर चुके हैं। पिछले साल अक्टूबर में जब वे दिल्ली आए थे, तब उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी, विदेश मंत्री एस जयशंकर, राष्ट्रीय सुरक्षा अधिकारी अजीत डोभाल और विदेश मंत्रालय और वाणिज्य मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात की थी।

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