जिस जगह पर 16 जनवरी की आधी रात नोएडा के एक सॉफ्टवेयर प्रोफेशनल की डूबने से दर्दनाक मौत हो गई, उस निचली जमीन को लेकर साल 2021 से कोर्ट में मुकदमा चल रहा है। पिछले साल इस मामले में सीबीआई ने भी जांच शुरू कर दी थी। इसी केस में एक रियल एस्टेट कंपनी के डायरेक्टर को गिरफ्तार किया जा चुका है। दरअसल, नोएडा के सेक्टर-150 की यह जमीन उसी कंपनी के पास थी।

बताया जाता है कि 2021 में नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की एक रिपोर्ट सामने आई थी, जिसमें नोएडा प्राधिकरण द्वारा सेक्टर-150 में प्रस्तावित स्पोर्ट्स सिटी के लिए दी गई जमीन में कई तरह की गड़बड़ियों का जिक्र किया गया था। बड़ी बात यह है कि जिस हिस्से में इस बार इतना बड़ा हादसा हुआ, वह भी इसी स्पोर्ट्स सिटी परियोजना का हिस्सा था। इसी वजह से सोमवार को उत्तर प्रदेश सरकार ने नोएडा प्राधिकरण के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) को तत्काल प्रभाव से पद से हटा दिया। मामले की जांच के लिए एक विशेष जांच टीम (SIT) का गठन भी किया गया है।

पिछले साल इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इस कथित घोटाले पर कड़ी टिप्पणी की थी और बिल्डरों के साथ-साथ सरकारी अधिकारियों के खिलाफ भी सीबीआई को एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए थे।

जानकारी के लिए बता दें कि साल 2004 में न्यू ओखला इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी (NOIDA) ने नोएडा में अंतरराष्ट्रीय स्तर की खेल सुविधाएं विकसित करने की योजना बनाई थी। उद्देश्य यह था कि यहां विश्वस्तरीय खेल ढांचा तैयार किया जाए। इस परियोजना की शुरुआती योजना के करीब 10 साल बाद, 2014 में, नोएडा प्राधिकरण ने सेक्टर-150 में स्पोर्ट्स सिटी विकसित करने के लिए करीब 12 लाख वर्ग मीटर जमीन के आवंटन हेतु आवेदन मांगे थे। उस समय जमीन का आरक्षित मूल्य 18,865 रुपये प्रति वर्ग मीटर तय किया गया था।

योजना के तहत डेवलपर को दी गई जमीन में 70 प्रतिशत हिस्से पर खेल सुविधाओं का विकास प्राथमिक रूप से करना था। यह जमीन न तो बेची जा सकती थी और न ही ट्रांसफर की जा सकती थी। स्पोर्ट्स सिटी परियोजना का काम रियल एस्टेट कंपनी लोटस ग्रीन कंस्ट्रक्शंस प्राइवेट लिमिटेड के नेतृत्व वाले एक कंसोर्टियम को 2,300 करोड़ रुपये से अधिक की बोली पर दिया गया था। तय किया गया था कि दिसंबर 2019 तक खेल सुविधाएं और दिसंबर 2021 तक आवासीय निर्माण पूरा कर लिया जाएगा।

साल 2015 में इस परियोजना में बड़ा मोड़ आया, जब लोटस ग्रीन को दी गई जमीन को 24 अलग-अलग प्लॉटों में बांट दिया गया। इन्हीं में से एक प्लॉट की जिम्मेदारी विज़टाउन प्लानर्स प्राइवेट लिमिटेड को दी गई थी। हाल ही में विज़टाउन के निदेशक अभय कुमार को युवराज की मौत के मामले में गिरफ्तार किया गया है।

2021 में आई CAG की रिपोर्ट में न सिर्फ योजना की खामियों का जिक्र था, बल्कि नोएडा प्राधिकरण की भूमिका पर भी गंभीर सवाल उठाए गए थे। रिपोर्ट में कहा गया कि सरकार से जरूरी मंजूरी लिए बिना भूमि उपयोग की श्रेणी बदली गई, 140 करोड़ रुपये से अधिक के शुल्क की वसूली नहीं की गई और प्लॉटों का अनधिकृत तरीके से विभाजन होने दिया गया। CAG ने अपनी रिपोर्ट में निष्कर्ष निकाला था कि इस पूरी परियोजना की वजह से नोएडा प्राधिकरण और उत्तर प्रदेश सरकार को करीब 9,000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। रिपोर्ट में यह भी कहा गया था कि सरकार को संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करनी चाहिए और उनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।

CAG रिपोर्ट के बाद जून 2021 में नोएडा प्राधिकरण ने स्पोर्ट्स सिटी से जुड़ी सभी गतिविधियों पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी और मामले को आगे की जांच के लिए राज्य सरकार के पास भेज दिया। इसके बाद उत्तर प्रदेश विधानसभा के सदस्यों की एक लोक लेखा समिति (PAC) का गठन किया गया। इसी दौरान मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट भी पहुंच गया।

24 फरवरी 2025 को दिए गए अपने आदेश में हाईकोर्ट ने कहा कि इतने बड़े स्तर का घोटाला नोएडा प्राधिकरण के अहम पदों पर बैठे अधिकारियों की संलिप्तता के बिना संभव नहीं है। अदालत ने कथित घोटाले में शामिल नोएडा प्राधिकरण के दोषी अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए। हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि अधिकारियों ने जानबूझकर आंखें बंद रखीं, जबकि बिल्डर आवासीय फ्लैट बेचते और उनका निर्माण करते रहे।

लोटस ग्रीन ने हाईकोर्ट के इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी, लेकिन 7 मार्च 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने जांच पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। हालांकि, अदालत ने यह निर्देश दिया कि फिलहाल कोई दमनात्मक कार्रवाई (coercive action) नहीं की जाए।

इस बीच, एक तरफ जहां स्पोर्ट्स सिटी परियोजना का काम रुका हुआ था, वहीं दूसरी तरफ उस जमीन पर पानी जमा होना शुरू हो गया। साल 2022 से ही इस प्लॉट में बड़ी मात्रा में पानी जमा होने के संकेत मिलने लगे थे। इसके बाद 14 मार्च 2022 को विज़टाउन प्लानर्स प्राइवेट लिमिटेड के एक निदेशक ने नोएडा प्राधिकरण के सीईओ को पत्र लिखकर बताया था कि सीवर और मुख्य नाले की लाइन दो-तीन जगहों से टूट चुकी है, जिसकी वजह से सीवर का पानी प्लॉट में बहकर आ रहा है।

पत्र में यह भी कहा गया था कि पूरा बेसमेंट सीवर और नाले के पानी से भर चुका है और अगर लाइन को जल्द ठीक कर पानी बाहर नहीं निकाला गया, तो कोई गंभीर हादसा हो सकता है।

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