Devendra Fadnavis on Ajit Pawar: पुणे नगर निगम चुनाव को लेकर महायुति के दो घटक दलों यानी बीजेपी और अजित पवार के बीच तनाव देखने को मिल रहा है। राज्य के सीएम देवेंद्र फड़नवीस अपने ही डिप्टी सीएम अजित पवार के एक चुनावी वादे पर भड़क गए। उन्होंने साफ कहा कि अजित पवार ने जो वादा किया है, वो पूरा किया ही नहीं जा सकता।
दरअसल, महायुति सरकार में शामिल उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने आश्वासन दिया है कि यदि वे नगर निगम की सत्ता में आते हैं, तो पुणे और पिंपरी-चिंचवाड़ के नागरिकों को मुफ्त बस और मेट्रो यात्रा की सुविधा दी जाएगी। इसको लेकर ही मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस ने गुस्सा जाहिर किया है।
‘घोषणा करने में क्या जाता है?’
मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस से हाल में इंटरव्यू के दौरान इस सवाल का जवाब दिया। उन्होंने कहा, “सच तो यह है कि मैं आज यह घोषणा करने वाला था कि पुणे से उड़ने वाले जितने भी विमान हैं, उनमें महिलाओं का टिकट माफ कर देना चाहिए। घोषणा करने में क्या जाता है? हमारे बाप का क्या जाता है घोषणा करने में?”
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चुनावी वादे को लेकर कही ये बात
देवेंद्र फड़नवीस ने कहा है कि कई बार हम राजनीति के क्षेत्र के लोग चुनाव जीतने की हताशा में घोषणापत्र जारी कर देते हैं, और उन घोषणापत्रों में कुछ भी कह देते हैं। फिर भी मेरा यह मानना है कि कम से कम ऐसी बातें कहनी चाहिए जिन पर लोगों को विश्वास हो सके, जिन्हें हम वास्तव में पूरा कर सकें।
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क्या मेट्रो का किराया मुफ्त करना संभव है?
इस बारे में भी मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस ने कहा कि मेट्रो केवल अकेले राज्य सरकार की नहीं है। इसमें केंद्र सरकार की भी हिस्सेदारी है। मेट्रो बोर्ड के अध्यक्ष केंद्रीय सचिव होते हैं और एमडी महाराष्ट्र से होते हैं। दूसरी बात यह कि किसी भी मेट्रो का किराया तय करने के लिए कानूनी रूप से एक ‘किराया निर्धारण समिति’ (Fare Fixation Committee) गठित की गई है और उसी समिति के पास कानूनी अधिकार हैं।
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सीएम ने कहा कि अगर कल मेरे मन में आए कि टिकट माफ कर दूं, तो भी मैं ऐसा नहीं कर सकता। वह समिति बताती है कि खर्च कितना है। कम से कम परिचालन खर्च तो निकलना ही चाहिए। यदि समाज इस खर्च को वहन नहीं करेगा और आप रियायत देना चाहते हैं, तो आप यह पैसा कहां से देंगे।
देवेंद्र फड़नवीस ने आगे कहा कि जो चीजें हमारे हाथ में नहीं हैं, उनके वादे नहीं करने चाहिए। उन्होंने कहा कि पुणे के लोग समय पर टैक्स भरने वाले लोग हैं। मैंने देखा है कि यहां लोग लाइन लगाकर टैक्स और बिजली का बिल भरते हैं। पुणे के लोगों को मुफ्त की चीजें नहीं चाहिए।
