Delhi Pollution News: दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण के विरोध में इंडिया गेट पर आयोजित विरोध प्रदर्शन के दौरान हाल ही में पुलिस मुठभेड़ में मारे गये इनामी माओादी माडवी हिडमा के समर्थन में नारे लगाये गये। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर काली-मिर्च-स्प्रे से हमला भी किया।

तीन से चार पुलिसकर्मियों को स्प्रे से जलन हुई और उन्हें अस्पताल ले जाया गया। पुलिस ने 15 लोगों को हिरासत में लिया है।

दिल्ली पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “कुछ प्रदर्शनकारी सी-हेक्सागन में घुस गए और आवाजाही रोकने के लिए लगाए गए बैरिकेडों को पार करने की कोशिश की। हमने उन्हें समझाने की कोशिश की कि उनके पीछे कई एबुलेंस फंसी हुई हैं और उन्हें इमरजेंसी मदद की जरूरत है, लेकिन वे बहुत ज्यादा आक्रोशित हो गए।”

पुलिसकर्मियों को लगा कि स्थिति हाथापाई तक बढ़ सकती है और उन्होंने प्रदर्शनकारियों को पीछे हटने की सलाह दी। अधिकारी ने कहा, “उन्होंने इनकार कर दिया, बैरिकेड तोड़ दिए, सड़क पर आ गए और वहीं बैठ गए। जब ​​हमारी टीमें उन्हें हटाने की कोशिश कर रही थीं, तो कुछ प्रदर्शनकारियों ने मिर्च स्प्रे से पुलिसकर्मियों पर हमला कर दिया। तीन से चार को जलन हुई और उनका इलाज चल रहा है।” डीसीपी (नई दिल्ली) देवेश कुमार महला ने पीटीआई को बताया, “यह बहुत ही असामान्य था। पहली बार प्रदर्शनकारियों ने ट्रैफिक और कानून-व्यवस्था संभालने वाले अधिकारियों पर मिर्च स्प्रे का इस्तेमाल किया।”

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प्रदर्शनकारियों का क्या कहना है?

इंडिया गेट पर प्रदर्शन में शामिल एक प्रदर्शनकारी ने कहा, “आज इंडिया गेट पर प्रदर्शन दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण के खिलाफ था। इसमें शामिल छात्र विभिन्न संगठनों से आए थे। सरकार को दिल्ली और उसके नागरिकों के हालात की जिम्मेदारी लेनी चाहिए। प्रदर्शनकारियों को बेरहमी से हिरासत में लिया गया। वीडियो में पुलिस उनके साथ हिंसक व्यवहार करती दिख रही है। पांच साथियों को गिरफ्तार करके संसद मार्ग लाया गया और संसद मार्ग के बाहर प्रदर्शन कर रहे हमारे 17 साथियों को भी हिरासत में लिया गया।”

प्रदर्शनकारी ने आगे कहा, “हिडमा एक आदिवासी है जिसने अपने अधिकारों के लिए हथियार उठाए। लोग उनके तरीके से असहमत हो सकते हैं और उसे गलत कह सकते हैं, लेकिन वे इसके पीछे के कारण को नकार नहीं सकते। निगमीकरण के खिलाफ संघर्ष आदिवासियों की लड़ाई है। यह जल, जंगल और जमीन की लड़ाई है। इसीलिए नारायण कान्हा को राष्ट्र-विरोधी नहीं कहा जा सकता। अपने अधिकारों की रक्षा करने वालों पर ऐसा दमन नहीं किया जा सकता।”