दिल्ली में मेट्रो नेटवर्क का विस्तार करते हुए सरकार ने 3 कॉरिडोर बनाने के लिए धनराशि जारी कर दी है। दिल्ली सरकार ने रविवार को कहा कि उसने दिल्ली मेट्रो रेल ट्रांजिट सिस्टम (एमआरटीएस) के चौथे चरण के शेष तीन कॉरिडोर के लिए 3,386.18 करोड़ रुपये की धनराशि जारी कर दी है। यह कदम राजधानी में भीड़भाड़ कम करने, प्रदूषण घटाने और सार्वजनिक परिवहन को मजबूत करने के उद्देश्य से उठाया गया है।

पहला कॉरिडोर, जो गोल्डन लाइन का विस्तार है, दक्षिण दिल्ली के लाजपत नगर से साकेत जी-ब्लॉक तक चलेगा । 8.385 किलोमीटर में फैला यह कॉरिडोर पूरी तरह से एलिवेटेड होगा और इसमें आठ स्टेशन होंगे। मुख्यमंत्री कार्यालय ने एक बयान में बताया कि दूसरा कॉरिडोर, ग्रीन लाइन का विस्तार है। यह उत्तर-पश्चिम दिल्ली के इंद्रलोक से इंद्रप्रस्थ तक 12.377 किलोमीटर लंबा होगा और इसमें 10 स्टेशन (1 एलिवेटेड और 9 अंडरग्राउंड) शामिल होंगे।

रिठाला को पड़ोसी राज्य हरियाणा के कुंडली से जोड़ने वाला कॉरिडोर

तीनों कॉरिडोर में से तीसरा और सबसे लंबा कॉरिडोर उत्तर-पश्चिम दिल्ली के रिठाला को पड़ोसी राज्य हरियाणा के कुंडली से जोड़ेगा। 26.463 किलोमीटर लंबा यह कॉरिडोर, रेड लाइन का विस्तार है। इसमें 21 स्टेशन होंगे और इससे रोहिणी, बवाना और नरेला के साथ-साथ राजधानी के उत्तरी किनारे पर स्थित औद्योगिक और आवासीय क्षेत्रों की कनेक्टिविटी में उल्लेखनीय सुधार होने की उम्मीद है।

पढ़ें- दिल्ली की रेखा सरकार का बड़ा फैसला

चार साल में पूरे होंगे दिल्ली मेट्रो के तीनों कॉरिडोर

बयान में इस बात पर जोर दिया गया है कि लगभग 47 किलोमीटर में फैले और 14,630.80 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाले ये कॉरिडोर चार साल के भीतर पूरे होने की उम्मीद है। अधिकारियों ने बताया कि ये तीनों कॉरिडोर कई इलाकों को जोड़ेंगे। लाजपत नगर-साकेत लाइन एंड्रयूज गंज, ग्रेटर कैलाश-I, चिराग दिल्ली, पुष्प भवन और साकेत जिला केंद्र जैसे क्षेत्रों से होकर गुजरेगी। इंद्रलोक-इंद्रप्रस्थ कॉरिडोर दयाबस्ती, सराय रोहिल्ला, झंडेवालन, नबी करीम, नई दिल्ली रेलवे स्टेशन, दिल्ली गेट और दिल्ली सचिवालय-आईजी स्टेडियम क्षेत्र सहित शहर के मध्य भागों को जोड़ेगा।

कितना लंबा है दिल्ली मेट्रो का नेटवर्क?

दिल्ली और उसके आसपास के इलाकों में 395 किलोमीटर का मेट्रो नेटवर्क मौजूद है, जिसमें रोजाना औसतन 40 लाख यात्री सफर करते हैं। दिल्ली मेट्रो के मौजूदा नेटवर्क को चौथे चरण में 110 किलोमीटर और पांचवें और चौथे चरण में 96 किलोमीटर तक बढ़ाया जा रहा है। चौथे चरण के पूरा होने के साथ ही रोजाना यात्रियों की संख्या दोगुनी होने की उम्मीद है। सरकार ने कहा कि कॉरिडोर के लिए टेंडर की प्रक्रिया वर्तमान में चल रही है और कुछ हिस्सों पर प्रारंभिक कार्य पहले ही शुरू हो चुका है।

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि मेट्रो नेटवर्क के विस्तार से भीड़भाड़ कम करने और प्रदूषण घटाने में मदद मिलेगी, जिससे दिल्ली और अधिक आधुनिक बनेगी। पिछले हफ्ते, उन्होंने एक उच्च स्तरीय बैठक के बाद कहा था कि सरकार अगले चार वर्षों में शहर में वायु प्रदूषण को कम करने के लिए कई कदम उठा रही है, जिसमें सार्वजनिक परिवहन को मजबूत करना भी शामिल है।

पढ़ें- पूरे देश में होगा वंदे भारत का नेटवर्क