2012 दिल्ली गैंगरेप मामले में सुप्रीम कोर्ट ने एक दोषी पवन गुप्ता की याचिका खारिज कर दिया है। दरअसल पवन गुप्ता ने घटना के वक्त नाबालिग होने का दावा किया था और इसी संबंध में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी है। न्यायमूर्ति आर भानुमति, न्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति ए एस बोपन्ना की पीठ ने पवन कुमार गुप्ता की याचिका पर सुनवाई की है। गैंगरेप के दोषी पवन कुमार गुप्ता के वकील एपी सिंह ने सुप्रीम कोर्ट की बेंच से कहा कि जब दिल्ली गैंगरेप की घटना हुई थी तब उसकी उम्र 17 साल, 1 महीने और 20 दिन थी। इसी वजह से उसे इस केस में नाबालिग माना जाए।
दोषी के वकील एपी सिंह ने अपनी दलील देते हुए कहा है कि ‘दोषी पवन की जन्मतिथि 8 अक्टूबर 1996 है। हमारे पास दस्तावेज हैं। पवन अपराध के समय नाबालिग था।’ वकील एपी सिंह ने गायत्री बाल स्कूल के सर्टिफिकेट का भी जिक्र किया। सुनवाई के दौरान जज भानुमति ने वकील को कहा कि जो दस्तावेज आप दे रहे हैं वह 2017 का है, जब कोर्ट ने आपको सजा सुना दी थी।
कोर्ट ने पवन के वकील से सवाल किया कि ‘आपने ये सर्टिफिकेट 2017 में हासिल किया। उससे पहले आपको कोर्ट से दोषी करार दिया गया था।’ सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट में पवन की 9 जुलाई 2018 को पुनर्विचार याचिका ख़ारिज हो चुकी हैं। सुप्रीम कोर्ट ने पवन के वकील को कहा, ‘पवन की उम्र का मुद्दा उसकी पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई के दौरान उठाया गया था और सुप्रीम कोर्ट इस दलील को पुनर्विचार याचिका के फैसले में पहले ही ख़ारिज कर चुका है, आप फिर वही मुद्दा उठा रहे हैं.. इस तरह अगर बार-बार कोर्ट में आते रहेंगे तो सुनवाई का कोई अंत नहीं होगा।’
आपको बता दें कि 17 जनवरी को पटियाला हाउस कोर्ट ने पवन समेत चार दोषियों को 1 फरवरी सुबह 6 बजे फांसी पर लटकाने का डेथ वॉरंट जारी किया था।
