Delhi Election/Chunav Results 2020: दिल्ली विधानसभा चुनाव में लगातार दूसरी बार कांग्रेस शून्य पर आउट हुई है। हाशिए पर खड़ी कांग्रेस को न तो सुभाष चोपड़ा और न हीं कीर्ति आजाद कमबैक करवा सके। पीसी चाको भी कांग्रेस को लड़ाई के मैदान में लाने में असफल हो गए। मौजूदा हालात को देखते हुए दिल्ली कांग्रेस में एक बड़ा बदलाव की संभावना है।
पिछले साल 20 जुलाई को तीन बार दिल्ली की मुख्यमंत्री रहीं और कांग्रेस की कद्दावर नेता शीला दीक्षित का निधन हो गया था। इसके बाद दिल्ली विधानसभा चुनाव के कुछ महीने पहले पिछले साल अक्टूबर महीने में सुभाष चोपड़ा को दिल्ली कांग्रेस का प्रमुख बनाया गया था। इनके साथ क्रिकेटर से नेता बने भाजपा के पूर्व सांसद कीर्ति आजाद का नाम भी पार्टी के प्रचार कमेटी में शामिल किया गया था। लेकिन न तो चोपड़ा और न हीं आजाद कांग्रेस की स्थिति सही कर पाए।
आजाद का पैनल चुनावों की समाप्ति के साथ समाप्त हो गया, चोपड़ा और पार्टी के दिल्ली प्रभारी पीसी चाको को लेकर भी कोई बड़ा फैसला लिया जा सकता है। हालांकि सुभाष चोपड़ा ने हार की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए मंगलवार को पद से इस्तीफा दे दिया। चोपड़ा के अनुसार उन्होंने दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी (डीपीसीसी) के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने कहा, ‘‘मैंने हार की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया है। अब आलाकमान को मेरे इस्तीफे पर निर्णय लेना है।’’
2015 विधानसभा चुनाव से पहले महासचिव शकील अहमद को हटाकर चाको को नवंबर 2014 में दिल्ली का प्रभारी बनाया गया था। जनवरी 2019 में आप से गठबंधन को लेकर चाको और शीला दीक्षित के बीच थोड़ी बहुत अनबन भी हुई थी। लेकिन केंद्रीय नेतृत्व ने चाको का बचाव किया था।
वहीं चुनाव में करारी शिकस्त के बाद कांग्रेस के दिल्ली प्रभारी पीसी चाको के एक बयान से घमासान शुरू हो गया है और कई नेताओं ने चाको पर हमला बोला है। चाको ने कहा कि कांग्रेस पार्टी का पतन 2013 में शुरू हुआ जब शीला दीक्षित मुख्यमंत्री थीं। उन्होंने कहा ‘‘एक नई पार्टी आम आदमी पार्टी (आप) के उदय ने कांग्रेस के पूरे वोट बैंक को छीन लिया। हम इसे कभी वापस नहीं पा सके। यह अभी भी आप के साथ बना हुआ है।’’
पूर्व केंद्रीय मंत्री मिलिंद देवरा ने इसको लेकर चाको पर निशाना साधा और कहा कि चुनावी हार के लिए दिवंगत शीला दीक्षित को जिम्मेदार ठहराना दुर्भाग्यपूर्ण है। देवरा ने कहा, ‘‘शीला दीक्षित जी एक बेहतरीन राजनीतिज्ञ और प्रशासक थीं। मुख्यमंत्री के रूप में उनके कार्यकाल के दौरान दिल्ली की तस्वीर बदली और कांग्रेस पहले से कहीं ज्यादा मजबूत हुई। उनके निधन के बाद उनको जिम्मेदार ठहराना दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने अपना जीवन कांग्रेस और दिल्ली के लोगों के लिए सर्मिपत कर दिया।’’
शीला दीक्षित के करीबी रहे कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने भी चाको पर निशाना साधते हुए कहा, ‘‘ 2013 में जब हम हारे तो कांग्रेस को दिल्ली में 24.55 फीसदी वोट मिले थे। शीला जी 2015 के चुनाव में शामिल नहीं थीं जब हमारा वोट प्रतिशत गिरकर 9.7 फीसदी हो गया। 2019 में जब शीला जी ने कमान संभाली तो कांग्रेस का वोट प्रतिशत 22.46 फीसदी हो गया।’’ (भाषा इनपुट के साथ)
