दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी (AAP) के संयोजक अरविंद केजरीवाल मानहानि के एक के बाद एक मामले में लगातार माफी मांग रहे हैं। दिल्ली के उपमुख्यमंत्री और AAP के वरिष्ठ नेता मनीष सिसोदिया ने केजरीवाल के इस कदम की जानकारी देते हुए अभी कुछ और मामलों में माफीनामा आने के संकेत दिए हैं। सिसोदिया ने कहा, ‘हमलोग उनलोगों से माफी मांगेंगे जिनको हमने दुख पहुंचाया है। हम यहां जनता की सेवा करने के लिए हैं। हमारे पास इतना समय नहीं है कि ऐसे मामलों के लिए कोर्ट जाएं। हम यहां (सत्ता) लोगों के कल्याण के लिए स्कूल और अस्पताल बनाने के लिए हैं।’ केजरीवाल के खिलाफ वित्त मंत्री अरुण जेटली ने भी आपराधिक मानहानि का मुकदमा दायर कर रखा है। बताया जाता है कि मुख्यमंत्री आने वाले कुछ दिनों में उनसे भी लिखित में माफी मांग लेंगे और कोर्ट से बाहर ही इस मामले का भी निपटारा कर लेंगे। जेटली ने वर्ष 2015 में केजरीवाल के अलावा AAP नेता राघव चड्ढा, कुमार विश्वास, आशुतोष, संजय सिंह और दीपक बाजपेयी का नाम भी केस में डाला था। इस बात का खुलासा नहीं किया गया है कि ये सभी लोग माफी मांगेंगे या सिर्फ केजरीवाल।

मुख्यमंत्री केजरीवाल और अन्य ने दिल्ली क्रिकेट एसोसिएशन से जुड़े एक विवाद में जेटली का नाम घसीटा था। केंद्रीय मंत्री ने आरोपों को बेबुनियाद करार देते हुए कानूनी कार्रवाई शुरू की थी। इस मामले में दोषी पाए जाने पर दो साल तक जेल की सजा हो सकती है। बता दें कि केजरीवाल ने सबसे पहले शिरोमणि अकाली दल के नेता और पंजाब के पूर्व नेता बिक्रम मजीठिया के खिलाफ लिखित में मांगी थी। उन्होंने अकाली नेता पर ड्रग माफिया से जुड़े होने का आरोप लगाया था। मजीठिया ने बाद में प्रेस कांफ्रेंस कर AAP नेताओं को माफ करने की बात कही थी। केजरीवाल ने केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्री नितिन गडकरी से भी लिखित में माफी मांग कर मामले को बंद करने का आग्रह किया। बता दें कि दिल्ली के मुख्यमंत्री ने भारत के सर्वाधिक भ्रष्ट लोगों की सूची में गडकरी के शामिल होने की बात कही थी। इस टिप्पणी से नाराज होकर बीजेपी के वरिष्ठ नेता ने उन पर मानहानि का केस दायर कर दिया था। केजरीवाल ने पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल से भी माफी मांग ली है। केजरीवाल ने 2013 में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में अमित सिब्बल (कपिल सिब्बल के बेटे) पर निजी लाभ के लिए शक्तियों के दुरुपयोग का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा था कि वह ऐसे समय में एक दूरसंचार कंपनी (वोडाफोन) की तरफ से सर्वोच्च न्यायालय में पेश हुए, जब उनके पिता कपिल सिब्बल केंद्रीय संचार मंत्री थे।