दिल्ली के उप राज्यपाल अनिल बैजल पिछले तीन दिनों से अपने घर से सरकारी काम-काज निपटाने पर मजबूर हैं। प्रमुख कारण- आम आदमी पार्टी (आप) के संयोजक व दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल हैं। गुरुवार को भी सीएम अपनी पार्टी के तीन मंत्रियों के साथ वहां धरने पर जमे रहे। उप राज्यपाल की ओर से दावा किया गया कि धरने के कारण वहां का काम-काज प्रभावित हो रहा था।

आईएएस अधिकारियों की कथित हड़ताल के चलते गुरुवार (14 जून) को भी सीएम के अलावा उनके तीन कबीना मंत्री- मनीष सिसोदिया, सत्येंद्र जैन और गोपाल राय का उप राज्यपाल के दफ्तर के बाहर बने प्रतीक्षालय पर धरना जारी रहा। मंगलवार से जैन तो बुधवार से सिसोदिया भूख हड़ताल पर हैं। यही वजह है कि बैजल को अधिकारियों के साथ बैठकें घर पर स्थित कैंप ऑफिस में करनी पड़ीं, जो कि सचिवालय के ठीक पीछे है।

सूत्रों के अनुसार, उप राज्यपाल ने यहां पर दिल्ली पुलिस, दिल्ली विकास प्राधिकरण और अन्य विभागों से जुड़ी फाइलों को देखा-समझा। मगर उनके पास उस दौरान दिल्ली सरकार की कोई भी फाइल नहीं आई, क्योंकि केजरीवाल व उनके मंत्री तो धरने पर हैं। पीटीआई के अनुसार, गुरुवार को दिल्ली के बढ़ते प्रदूषण और दम घोंटू धूल को लेकर आपातकालीन बैठक बुलाई गई, जो उप राज्यपाल के घर पर हुई थी। दिल्ली के पर्यावरण मंत्री इमरान हुसैन इस दौरान बैजल से मिलने उनके कैंप वाले ऑफिस पहुंचे थे।

पूरे सियासी घटनाक्रम के बीच सीएम की पत्नी सुनीता केजरीवाल ने आरोप लगाया कि उनको व बाकी परिजन को धरने पर बैठे मंत्रियों से नहीं मिलने दिया गया। सुनीता ने ट्वीट कर कहा कि उप राज्यपाल जी, हम चार महिलाओं को धरने पर बैठे मंत्रियों से नहीं मिलने दिया जा रहा है। कृपया हस्तक्षेप करें।

आप नेता संजय सिंह ने भी दावा किया कि उप राज्यपाल के दफ्तर में धरने पर बैठे सीएम व अन्य मंत्रियों से उस दौरान किसी को भी मिलने की इजाजत नहीं दी गई। कहा गया कि अगर किसी ने वैसा करने की कोशिश की, तो उसे गिरफ्तार कर लिया जाएगा। हालांकि, सीएम व अन्य मंत्रियों के परिजन उनसे उप राज्यपाल के दफ्तर के बाहर मिल सकते हैं, क्योंकि उस पर किसी प्रकार की रोक नहीं है।