बिहार के विधानसभा चुनाव में बेहद खराब प्रदर्शन के बाद कांग्रेस अब एक्शन के मूड में है। महागठबंधन में रहकर चुनाव लड़ने वाली कांग्रेस सिर्फ 6 सीटों पर ही जीत दर्ज कर पाई थी। इस खराब प्रदर्शन के बाद पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष राजेश कुमार ने अनुशासनात्मक समिति बनाई थी।

इस समिति ने अब तक सात नेताओं को पार्टी से बाहर कर दिया है और 36 अन्य नेताओं को कारण बताओ नोटिस जारी किए हैं। इन सभी पर अनुशासनहीनता और पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने का आरोप है।

राजेश कुमार, अल्लावरू के खिलाफ उठाई थी आवाज

चुनाव नतीजों के बाद कांग्रेस ने जिन नेताओं के खिलाफ कार्रवाई की है उनमें से अधिकतर ऐसे हैं जिन्होंने प्रदेश अध्यक्ष राजेश कुमार और बिहार के प्रभारी कृष्णा अल्लावरू के खिलाफ आवाज उठाई थी। उन्होंने इन नेताओं पर टिकट देने के बदले रिश्वत लेने का आरोप लगाया था।

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बिहार में वोटिंग से ठीक पहले भी 18 अक्टूबर को कांग्रेस के कई नेताओं ने पटना में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी और इसमें गंभीर आरोप लगाए थे। इन नेताओं ने कहा था कि टिकट के बदले पैसे लिए गए हैं। इस वजह से कांग्रेस की काफी किरकिरी हुई थी।

ऐसे नेताओं में कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता आनंद माधव और खगड़िया से विधायक छत्रपति यादव सहित कई वरिष्ठ नेता शामिल थे। आनंद माधव और छत्रपति यादव को भी नोटिस जारी किया गया है।

बिहार के सांसद तारिक अनवर ने द इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि राज्य इकाई ने कुछ नेताओं के खिलाफ कार्रवाई के लिए अनुशासनात्मक समिति से अनुरोध किया गया है। अनवर ने कहा, “यह मामला कांग्रेस अध्यक्ष (मल्लिकार्जुन खरगे) के पास है और वही इस पर फैसला लेंगे।”

कांग्रेस के एक सीनियर नेता ने द इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि जिन नेताओं के खिलाफ अनुशासन का डंडा चला है, उसमें से कुछ के खिलाफ कार्रवाई सही है जबकि कुछ लोगों को निशाना बनाया गया है।

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छत्रपति यादव को नहीं दिया गया टिकट

छत्रपति यादव ने कहा, ‘हमने पार्टी के खिलाफ नहीं उन लोगों के विरोध में बात की जिन्होंने अपने पद का गलत इस्तेमाल किया।’ छत्रपति यादव 2020 में खगड़िया सीट से चुनाव जीते थे लेकिन इस बार उन्हें टिकट नहीं दिया गया।

आनंद माधव ने प्रदेश अध्यक्ष राजेश कुमार द्वारा गठित की गई अनुशासनात्मक समिति पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि एआईसीसी ऐसी कमेटी बना सकती है ना कि प्रदेश कांग्रेस।

बिहार कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कपिल देव प्रसाद यादव कहते हैं कि नाराज नेताओं को पार्टी के भीतर ही आवाज उठानी चाहिए थी। इन लोगों ने कृष्णा अल्लावरू और राजेश कुमार सहित पार्टी के प्रदेश नेतृत्व के खिलाफ झूठे आरोप लगाए और इसलिए यह कार्रवाई की गई है।

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