कांग्रेस नेता राहुल गांधी देश में कोरोना के हालात के साथ ही आर्थिक मोर्चे पर मोदी सरकार को घेरने का एक भी मौका नहीं गंवा रहे हैं। इस क्रम में राहुल गांधी ने एक बार फिर पीएम मोदी और केंद्र की एनडीए सरकार पर निशाना साधा है।

इस बार राहुल गांधी ने कोरोना काल में सुप्रीम कोर्ट की उस टिप्पणी को लेकर पीएम मोदी पर हमला किया है जिसमें शीर्ष अदालत ने केंद्र सरकार को कोरोना महामारी के दौरान राहत के तौर पर लोन पर ब्याज माफी के मुद्दे पर फटकार लगाई थी। राहुल गांधी ने ट्वीट कर कहा कि बड़े व्यवसायों को 1.45 लाख करोड़ रुपये की छूट का फायदा दिया लेकिन मध्यम वर्ग को लोन पर ब्याज माफी तक नहीं दी जा रही है। उन्होंने कहा कि ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि यह सूटबूट की सरकार है।

मालूम हो कि सुप्रीम कोर्ट ने कोविड- 19 के बीच लागू लॉकडाउन के दौरान कर्ज की स्थगित की गई किस्तों पर ब्याज लिये जाने के मुद्दे पर बुधवार को कहा था कि केन्द्र इस मामले में रिजर्व बैंक की ओट ले रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से इस मुद्दे पर एक सप्ताह के भीतर जवाब मांगा। अदालत का कहना था कि केन्द्र ने अभी तक अपनी स्थिति स्पष्ट नहीं की है।

केन्द्र के पास आपदा प्रबंधन कानून के तहत व्यापक शक्तियां हैं। आपको केन्द्र की स्थिति स्पष्ट करनी होगी।’’ आगरा के निवासी गजेन्द्र शर्मा ने इस संबंध में याचिका दायर की है। याचिकाकर्ता ने रोक की अवधि के दौरान रिण पर ब्याज लेने संबंधी रिजर्व बैंक की 27 मार्च की अधिसूचना को उसके अधिकार क्षेत्र से बाहर बताने का निर्देश देने का आग्रह किया है।

इससे पहले राहुल गांधी ने भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की एक ताजा रिपोर्ट का हवाला देते हुए सरकार पर निशाना साधा था। राहुल ने कहा कि ध्यान भटकाने से नहीं, बल्कि खर्च बढ़ाने और गरीबों के हाथों में पैसे देने से अर्थव्यवस्था पटरी पर आएगी। उन्होंने ट्वीट किया, ‘‘जिस बारे में मैं महीनों से आगाह कर रहा था उसकी पुष्टि आरबीआई ने की है।

सरकार को अब ज्यादा खर्च करने की जरूरत है, कर्ज देने की जरूरत नहीं है। गरीब को पैसा दीजिए, उद्योगपतियों के कर में कटौती नहीं। खपत से अर्थव्यवस्था को फिर से पटरी पर लाइए।’’ कांग्रेस नेता ने कहा कि मीडिया के जरिए भटकाने से गरीबों की मदद नहीं होगी और न ही आर्थिक त्रासदी गायब होगी।