मोदी सरकार ने मनरेगा का नाम बदल दिया है और कांग्रेस इसका जमकर विरोध कर रही है। अब कांग्रेस ने ‘मनरेगा बचाओ संग्राम’ अभियान का ऐलान किया है। मनरेगा का नया नाम VB G RAM G एक्ट हो गया है। कांग्रेस अब शांतिपूर्ण धरने, विधानसभा का घेराव, पंचायत-स्तर पर लोगों तक पहुंच बनाएगी। कांग्रेस ने शनिवार को VB-G RAM G एक्ट के खिलाफ ‘मनरेगा बचाओ संग्राम’ के लिए अपनी साल भर की योजना बताई। इसका पहला चरण 10 जनवरी से 25 फरवरी तक चलेगा।

जयराम रमेश ने क्या कहा?

कांग्रेस ने राज्य इकाइयों से भागीदारी, लामबंदी, मीडिया तक पहुंच सुनिश्चित करने और पार्टी हाईकमान को विस्तृत रिपोर्ट सौंपने को कहा गया है।कांग्रेस ने कहा कि वह अब वापस लिए गए तीन कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली केंद्रित बड़े आंदोलन की तरह ही आंदोलन करने की कोशिश कर रही है। पार्टी मुख्यालय में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि पिछले शनिवार को CWC की बैठक में सदस्यों ने ‘मनरेगा बचाओ संग्राम’ पर चर्चा की और इसकी रूपरेखा तैयार की।

AICC महासचिव (संगठन) के.सी. वेणुगोपाल ने बताया कि VB-G RAM G एक्ट के तहत, रोजगार अब अधिकार नहीं रहा और यह केवल केंद्र द्वारा अधिसूचित पंचायतों में ही प्रदान किया जाएगा। वेणुगोपाल ने कहा, “मनरेगा (UPA शासन के दौरान लागू) सबसे विकेन्द्रीकृत योजना थी, लेकिन अब सब कुछ दिल्ली से तय होगा और गांवों को नुकसान होगा।” उन्होंने नए कानून के तहत कार्य दिवस बढ़ने के केंद्र के दावे को फर्जी और झूठा बताया।

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मनरेगा कोई दान नहीं- खड़गे

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने शनिवार को कहा, “मनरेगा कोई दान नहीं है। यह एक कानूनी गारंटी है। करोड़ों सबसे गरीब लोगों को अपने ही गांवों में काम मिला। मनरेगा ने भूख और संकट के कारण होने वाले पलायन को कम किया, ग्रामीण मजदूरी बढ़ाई, और महिलाओं की आर्थिक गरिमा को मजबूत किया। VB-G RAM G इस अधिकार को खत्म करने के लिए बनाया गया है। बजट सीमित कर दिए जाएंगे, इसलिए जब पैसा खत्म हो जाएगा तो काम भी खत्म हो जाएगा, यहां तक कि संकट के समय भी और दिल्ली फंड और कामों के बारे में फैसला करेगी, जिससे ग्राम सभाएं और पंचायतें अप्रासंगिक हो जाएंगी।”

खड़गे ने अपने पोस्ट में आगे कहा, “मनरेगा पर हमला करना करोड़ों मजदूरों और उनके संवैधानिक अधिकारों पर हमला करने जैसा है। हम हर पंचायत से लेकर संसद तक शांतिपूर्ण और दृढ़ता से इसका विरोध करेंगे।”

वेणुगोपाल ने दी प्रदर्शन की जानकारी

वहीं वेणुगोपाल ने कहा कि सबसे पहले 8 जनवरी को देश भर में राज्य-स्तरीय तैयारी बैठकें आयोजित की जाएंगी, जहां राज्य नेतृत्व को नए रोजगार गारंटी कानून के प्रभावों के बारे में जानकारी दी जाएगी और जिलेवार जिम्मेदारियां तय की जाएंगी। उन्होंने कहा कि इसके बाद 10 जनवरी को जिला-स्तरीय प्रेस कॉन्फ्रेंस होंगी ताकि जिले स्तर पर औपचारिक रूप से अभियान शुरू किया जा सके। उन्होंने कहा कि 11 जनवरी को पार्टी के जिला मुख्यालयों और प्रमुख सार्वजनिक स्थानों पर एक दिन का उपवास रखा जाएगा, जिसमें नेता, चुने हुए प्रतिनिधि और मनरेगा कार्यकर्ता हिस्सा लेंगे।

वेणुगोपाल ने कहा कि 12 से 29 जनवरी तक पंचायत स्तर पर लोगों से संपर्क किया जाएगा, जिसके दौरान कांग्रेस अध्यक्ष और विपक्ष के नेता (राहुल गांधी) के पत्र ग्राम प्रधानों, पूर्व ग्राम प्रधानों, रोजगार सेवकों और मनरेगा कार्यकर्ताओं को दिए जाएंगे। उन्होंने आगे कहा कि साथ ही, विधानसभा स्तर पर नुक्कड़ सभाएं और पैम्फलेट बांटे जाएंगे।

30 जनवरी 2026 को वार्ड और ब्लॉक स्तर पर शांतिपूर्ण धरने आयोजित किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि 31 जनवरी से 6 फरवरी तक जिला स्तर पर “मनरेगा बचाओ धरना” आयोजित किया जाएगा। 7 से 15 फरवरी तक, पार्टी के राज्य नेतृत्व द्वारा विधानसभाओं के सामने विरोध प्रदर्शन और घेराव आयोजित किए जाएंगे। 16 से 25 फरवरी तक जोनल AICC रैलियां आयोजित की जाएंगी। केसी वेणुगोपाल ने कहा कि पहले चरण के खत्म होने से पहले AICC द्वारा चार बड़ी जोनल रैलियां आयोजित की जाएंगी।