डाक विभाग की पिछले रविवार को हुई एक परीक्षा का माध्यम केवल हिंदी और अंग्रेजी रखने के विरोध में मंगलवार को राज्यसभा में अन्नाद्रमुक, द्रमुक सहित कई दलों के सदस्यों के हंगामे के कारण कार्यवाही चार बार बाधित हुई। हालांकि बाद में सरकार की ओर से इस परीक्षा को रद्द करने और विभिन्न भारतीय भाषाओं में नए सिरे से परीक्षा कराने की घोषणा के बाद सदन में सामान्य तरीके से कामकाज होने लगा। इस मुद्दे पर मंगलवार को चार बार के स्थगन के बाद फिर शुरू हुई बैठक में संचार मंत्री रविशंकर प्रसाद ने सदन में घोषणा की कि 14 जुलाई को हुई परीक्षा रद्द कर दी गई है और नए सिरे से होने वाली परीक्षा तमिल सहित सभी क्षेत्रीय भाषाओं में होगी। विभिन्न दलों के हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही दोपहर दो बजे के पहले पूरी तरह से बाधित रही। दोपहर दो के बाद भी हंगामे के कारण सदन की बैठक आधे घंटे के लिए स्थगित की गई।

इसके बाद संचार मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि उन्होंने इस मुद्दे पर गौर किया और 14 जुलाई को डाक विभाग के लिए हुई परीक्षा को रद्द कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि आगे नए सिरे से होने वाली परीक्षा सभी क्षेत्रीय भाषाओं में होगी। उन्होंने कहा कि सरकार तमिल सहित सभी क्षेत्रीय भाषाओं का सम्मान करती है। उनकी इस घोषणा के बाद अन्नाद्रमुक नेता नवनीत कृष्णन और बाकी पेज 8 पर वी मैत्रेयन, माकपा नेता टी रंगराजन, द्रमुक नेता टी शिवा, भाकपा नेता डी राजा और कांग्रेस नेता आनंद शर्मा, भाजपा नेता भूपेंद्र यादव, सपा नेता रामगोपाल यादव आदि ने सरकार को यह संवेदनशील मुद्दा सुलझाने के लिए धन्यवाद दिया। हालांकि रामगोपाल यादव ने मांग की कि भोजपुरी भाषा को आधिकारिक भाषा की सूची में शामिल किया जाए। इसके बाद सदन में सुचारु रूप से कामकाज हुआ।

इससे पहले इस मुद्दे पर हंगामे के कारण उच्च सदन में शून्यकाल और प्रश्नकाल नहीं चल पाए थे। सुबह बैठक शुरू होते ही अन्नाद्रमुक, द्रमुक, भाकपा और माकपा सदस्यों ने तमिलनाडु में डाकिया और अन्य पदों के लिए हुई डाक विभाग की परीक्षा रद्द करने की मांग की। इन सदस्यों ने कहा कि यह परीक्षा नए सिरे से ली जानी चाहिए जिसमें प्रश्न हिंदी व अंग्रेजी के साथ तमिल में भी पूछे जाने चाहिए।

सभापति ने हंगामा कर रहे सदस्यों से शांत रहने और शून्यकाल चलने देने की अपील की। उन्होंने कहा कि सदस्य सरकार को अपनी मांग पर जवाब देने के लिए आदेश नहीं दे सकते। नियमों में ऐसा नहीं कहा गया है। मैं आदेश नहीं दे सकता, यह उचित नहीं है। बाद में प्रश्नकाल में भी यही नजारा देखने को मिला और विभिन्न विपक्षी दलों के सदस्य आसन के समीप आकर नारेबाजी करते रहे।