वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में बजट सत्र के पहले दिन देश का आर्थिक सर्वेक्षण 2021 पेश किया। इसके साथ ही लोकसभा की कार्यवाही को 1 फरवरी तक स्थगित कर दिया गया है। 1 फरवरी को देश का आम बजट भी पेश होना है। आज हम आपको इस रिपोर्ट में बताएंगे कि Economic Survey क्या होता है? मुख्य रूप से आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट में इस बात का लेखा-जोखा होता है कि पिछले 12 महीने में देश ने किस तरह विकास किया। आर्थिक सर्वे में इस बात का जिक्र रहता है कि मौजूदा सरकार ने जो नीतियां बनाई या जो भी विकास कार्यक्रम चलाए उसका क्या असर हुआ। Economic Survey 2020-21 को मुख्य आर्थिक सलाहकार कृष्णामूर्ति सुब्रमण्यम ने बनाया है।
आसान भाषा में कहें तो आर्थिक सर्वेक्षण अर्थव्यवस्था की सालाना आधिकारिक रिपोर्ट होती है। इस दस्तावेज को बजट सत्र के दौरान संसद के दोनों सदनों में पेश किया जाता है। इसमें भविष्य में बनाई जाने वाली योजानाओं और अर्थव्यवस्था में आने वाली चुनौतियों की सारी जानकारी दी जाती है। इस सर्वेक्षण में देश के आर्थिक विकास का अनुमान होता है।
आर्थिक सर्वेक्षण में इस बात की जानकारी दी जाती है कि आगामी वित्त वर्ष में देश की अर्थव्यवस्था रफ्तार पकड़ेगी या फिर धीमी रहेगी। सर्वेक्षण के आधार पर ही सरकार द्वारा बजट में ऐलान किए जाते हैं, हालांकि इन सिफारिशों को मानने के लिए सरकार कानूनी तौर पर बाध्य नहीं होती है। बजट से पहले आर्थिक सर्वेक्षण पेश करने की रीत देश में बरसों से है। सबसे पहले यह साल 1950-51 में लोकसभा में पेश किया गया, केंद्रीय बजट के साथ। इस साल आर्थिक सर्वेक्षण बजट पेश होने से तीन दिन पहले पेश किया गया।
आम बजट से पहले शुक्रवार को संसद में पेश किए गए आर्थिक सर्वेक्षण के अनुमानों के मुताबिक भारत की आर्थिक वृद्धि दर अगले वित्त वर्ष में 11 प्रतिशत के स्तर पर पहुंच जाएगी और महामारी के चलते आर्थिक संकुचन के बाद वी आकार (गोता खाने के तीव्र वृद्ध) का सुधार देखने को मिलेगा। इसके साथ ही 31 मार्च 2021 को खत्म हो रहे चालू वित्त वर्ष के दौरान सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में रिकॉर्ड 7.7 प्रतिशत की गिरावट का अनुमान जताया गया है।
भारत में इससे पहले जीडीपी में 1979-80 में सबसे अधिक 5.2 प्रतिशत का संकुचन हुआ था। आर्थिक सर्वेक्षण 2020-21 में कहा गया है कि कृषि क्षेत्र में वृद्धि जारी है, जबकि कोविड-19 महामारी को रोकने के लिए लगाए गए लॉकडाउन के चलते सेवा, विनिर्माण और निर्माण क्षेत्र सबसे अधिक प्रभावित हुए। सर्वेक्षण में कहा गया, ‘‘महामारी के चलते 2020-21 में अनुमानित 7.7 प्रतिशत संकुचन के बाद भारत का वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद 2021-22 में 11.0 प्रतिशत और वर्तमान बाजार मूल्य पर सकल घरेलू उत्पाद 15.4 प्रतिशत की दर से बढ़ने का अनुमान है।’’
सर्वेक्षण में कहा गया कि वैक्सीन दिए जाने और आर्थिक गतिविधियों के सामान्य होने के साथ ही ये अनुमान बढ़ भी सकते हैं। सर्वेक्षण में कहा गया है कि नियमों को आसान बनाने और सुधारों के चलते आपूर्ति पक्ष में तेजी आने, बुनियादी ढांचा क्षेत्र में निवेश बढ़ाने, उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन योजनाओं के माध्यम से विनिर्माण क्षेत्र को बढ़ावा देने, सेवा क्षेत्र में बढ़ोतरी और विवेकाधीन खपत में बढ़ोतरी से आर्थिक वृद्धि को समर्थन मिलेगा।
इसके अलावा वैक्सीन के आने और कम ब्याज दरों तथा पर्याप्त नकदी के चलते कर्ज में बढ़ोतरी से वृद्धि को समर्थन मिलेगा। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा संसद में पेश किए गए सर्वेक्षण में कहा गया कि अप्रैल से नवंबर 2020 तक उपलब्ध रुझानों के आधार पर चालू वर्ष के दौरान वित्तीय फिसलन होने का अनुमान है। साथ ही भारत 17 वर्षों के बाद चालू वित्त वर्ष में चालू खाते में अधिशेष देख सकता है।
भारत ने चालू वर्ष की पहली छमाही में जीडीपी का 3.1 प्रतिशत अधिशेष दर्ज किया था, जो मोटे तौर पर सेवाओं के निर्यात में जोरदार बढ़ोतरी के चलते हुआ। सर्वेक्षण के मुताबिक वस्तु और सेवाओं, दोनों के आयात रुझान को देखते हुए, यह उम्मीद है कि भारत 17 साल की अवधि के बाद जीडीपी का वार्षिक चालू खाता अधिशेष कम से कम दो प्रतिशत होगा। सर्वेक्षण के अनुसार महामारी के चलते चालू वित्त वर्ष में जीडीपी में 7.7 प्रतिशत का संकुचन होने की उम्मीद है, लेकिन भारत अगले दो वर्षों में सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था बन सकता है।
बता दें कि शुक्रवार को संसद के बजट सत्र (Budget Session 2021) की शुरुआत में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद का अभिभाषण हुआ। इस दौरान उन्होंने कहा, ‘अपने सभी निर्णयों में मेरी सरकार ने संघीय ढांचे की सामूहिक शक्ति का अद्वितीय उदाहरण भी प्रस्तुत किया है। केंद्र और राज्य सरकारों के बीच इस समन्वय ने लोकतंत्र को मजबूत बनाया है और संविधान की प्रतिष्ठा को सशक्त किया है।’
भाषा इनपुट के साथ
