भारतीय जनता पार्टी (BJP) को जल्द ही अपना नया राष्ट्रीय अध्यक्ष मिलने जा रहा है। कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नवीन को अगले हफ्ते तक यह जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है। नितिन नवीन का बीजेपी अध्यक्ष बनना सिर्फ एक बड़ा संगठनात्मक फैसला नहीं है, बल्कि यह कई अहम राजनीतिक और रणनीतिक चुनौतियां भी अपने साथ लेकर आएगा।

इन चुनौतियों में लोकसभा और विधानसभा में महिला आरक्षण, 2027 में प्रस्तावित जातिगत जनगणना और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का महत्वाकांक्षी फैसला ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ शामिल है। इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में कई भाजपा नेताओं ने माना है कि नितिन नवीन को न केवल मजबूत नेतृत्व क्षमता दिखानी होगी, बल्कि पार्टी के भीतर सहमति बनाना भी उनकी बड़ी जिम्मेदारी होगी। साथ ही उन्हें यह भी तय करना होगा कि बीजेपी की अगली पीढ़ी के कौन से नेता आगे लाए जाएं।

बताया जा रहा है कि बीजेपी नए पार्टी अध्यक्ष के लिए 18 जनवरी को नोटिफिकेशन जारी कर सकती है। इसके अगले दिन नितिन नवीन अपना नामांकन दाखिल करेंगे। चूंकि उनके खिलाफ किसी अन्य उम्मीदवार के मैदान में उतरने की संभावना नहीं है, ऐसे में उनके निर्विरोध चुने जाने की पूरी उम्मीद है। माना जा रहा है कि 20 जनवरी तक नितिन नवीन औपचारिक रूप से बीजेपी के नए अध्यक्ष बन सकते हैं और जेपी नड्डा की जगह लेंगे।

मंगलवार को दिल्ली में वरिष्ठ भाजपा नेताओं की एक अहम बैठक हुई थी, जिसमें नए पार्टी अध्यक्ष को लेकर विस्तार से चर्चा की गई। अब माना जा रहा है कि जैसे ही नितिन नवीन जिम्मेदारी संभालेंगे, उनके सामने सबसे पहली चुनौती पश्चिम बंगाल, असम, केरल, तमिलनाडु और पुडुचेरी के चुनाव होंगे।

एक वरिष्ठ भाजपा नेता का कहना है कि असल चुनौती इन चुनावों के बाद शुरू होगी, क्योंकि पार्टी को 2029 के लोकसभा चुनाव की तैयारी करनी होगी। यह चुनाव इसलिए भी खास होगा, क्योंकि तब तक परिसीमन की प्रक्रिया पूरी हो चुकी होगी और महिलाओं को लोकसभा व विधानसभा में 33 प्रतिशत आरक्षण भी लागू होगा। बदले हुए इन राजनीतिक समीकरणों में पार्टी को किस तरह आगे बढ़ाया जाए, यह नितिन नवीन के लिए बड़ी परीक्षा होगी।

पार्टी के भीतर यह भी माना जा रहा है कि इन सभी मुद्दों में ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ सबसे अहम साबित हो सकता है। एक भाजपा नेता के मुताबिक, अगर यह सपना साकार होता है, तो इससे देश की राजनीति की पूरी संरचना बदल जाएगी। उन्होंने कहा कि फिलहाल बीजेपी का चुनावी तंत्र काफी हद तक ऑटो-पायलट मोड पर काम करता है, जहां उम्मीदवारों का चयन और रणनीति पिछले चुनावों के आधार पर तय होती है। लेकिन लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ होने की स्थिति में पार्टी को उतना समय और लचीलापन नहीं मिलेगा।

बीजेपी नेताओं का यह भी मानना है कि नितिन नवीन की असली परीक्षा दक्षिण भारत में होगी। तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी जैसे राज्यों में पार्टी के विस्तार की जिम्मेदारी उनके कंधों पर होगी। अब तक बीजेपी दक्षिण भारत में सिर्फ कर्नाटक में ही एक बड़ी राजनीतिक ताकत बन पाई है, जबकि बाकी राज्यों में पार्टी के सामने अब भी कड़ी चुनौती बनी हुई है।

एक अन्य भाजपा नेता ने कहा कि प्रस्तावित जातिगत जनगणना के नतीजे भी राजनीतिक समीकरणों को बदल सकते हैं। पार्टी को इन आंकड़ों को गंभीरता से समझना होगा, क्योंकि यही आंकड़े आने वाले लोकसभा चुनावों की रणनीति तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे।

ये भी पढ़ें- कहां रहेंगे बीजेपी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष