सुप्रीम कोर्ट ने देश पटाखे फोड़ने का टाइम फिक्स कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि ऐसे पटाखे फोडे़ और बेचे जाएं जो कम प्रदूषण करते हों। इसके अलावा पटाखे रात 8 बजे से लेकर 10 बजे तक ही फोडें। तीन जजों की खंडपीठ ने कहा कि क्रिसमस, न्यू ईयर, गुरुपर्व और शादी जैसे मौकों पर भी कुछ देर के लिए आतिशबाजी की जा सकती है। ज्यादा प्रदूषण करने वाले और तेज आवाज फैलाने वाले पटाखों की बिक्री और फोड़ने पर रोक रहेगी। इस पर बीजेपी सांसद चिंतामणि मालवीय ने कहा कि हिंदू कैलेंडर के मुताबिक हमारे धर्म परंपराओं और त्यौहारों का पालन किया जाता है। मैं पहले पूजा करुंगा उसके बाद ही पटाखे फोडूंगा। हम त्यौहारों पर समय सीमा निर्धारित नहीं कर सकते हैं, ऐसे प्रतिबंध मुगल काल में भी नहीं थे। यह अस्वीकार्य है।
आपको बता दें कि पेट्रोलियम तथा विस्फोटक सुरक्षा संगठन (PESO) सुनिश्चित करेगा कि तय लेवल से ज्यादा आवाज वाले पटाखे न बेचे जाएं। PESO तय लेवल से ज्यादा आवाज वाले पटाखों के निर्माता और विक्रेता का लाइसेंस निरस्त कर सकता है। क्रिसमस और नए साल के मौके पर रात 11.55 से 12.30 तक ही पटाखे फोड़े जा सकते हैं। केंद्र और राज्य सामुदायिक आतिशबाजी को बढ़ावा देने के तरीके तलाशें ताकि ज्यादा प्रदूषण ना हो। इसके लिए विशेष स्थान पहले से तय किए जाएं। ऐसे पटाखे जो बनाए जा चुके हैं लेकिन निर्धारित की गई शर्तों को पूरा नहीं करते हैं उन्हें दिल्ली और एनसीआर रीजन में नहीं बेचा जा सकता है।
सुप्रीम कोर्ट ने पहले कहा था कि प्रतिबंध से जुड़ी अर्जी पर विचार करते समय पटाखा उत्पादकों के आजीविका के मौलिक अधिकार और देश के 1.3 अरब लोगों के स्वास्थ्य अधिकार समेत विभिन्न पहलुओं को ध्यान में रखना होगा। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 21 (जीवन के अधिकार) सभी वर्ग के लोगों पर लागू होता है और पटाखों पर देशव्यापी बैन पर विचार करते समय संतुलन बरकरार रखने की जरूरत है। कोर्ट ने केंद्र से प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए उपाय सुझाने और यह बताने को कहा था कि पटाखे पर बैन लगाने से व्यापक रूप से जनता पर क्या प्रभाव पड़ेगा।
