बीजेपी ने चुनाव आयोग के द्वारा की जा रही Special Intensive Revision (एसआईआर) को लेकर बेहद सख्त रुख अपनाया है। बीजेपी का कहना है कि एसआईआर से बांग्लादेश से आए अवैध घुसपैठियों को देश से बाहर खदेड़ दिया जाएगा लेकिन पश्चिम बंगाल में बीजेपी ने रणनीति बदलते हुए नरम रुख अपना लिया है। बीजेपी ने कहा है कि वह राष्ट्रवादी मुसलमानों के खिलाफ नहीं है।

कुछ महीने बाद होने वाले पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव से पहले बिहार के चुनाव नतीजे बीजेपी के लिए मजबूत आधार लेकर आए हैं।

बीजेपी के एक सीनियर नेता कहते हैं कि बिहार में इस बार पार्टी को मुस्लिम समुदाय के वोट मिले और हमें भरोसा है कि बंगाल में भी ऐसा ही होगा।

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बीजेपी नेता ने कहा, ‘बंगाल में मुस्लिम समुदाय की आबादी लगभग 30% है। यह सच है कि बंगाल में केवल 40-50 सीटों पर ही मुस्लिम समुदाय असरदार है और बाकी सीटों पर मुसलमान बहुसंख्यक नहीं हैं लेकिन उनकी आबादी अच्छी है। 2021 के विधानसभा चुनाव और 2024 के लोकसभा चुनाव में हमें उनका साथ नहीं मिला था लेकिन इस बार हम ऐसा नहीं होने देना चाहते।’

अल्पसंख्यक मतदाताओं तक पहुंचने की कोशिश

बीजेपी नेता का कहना है कि अल्पसंख्यक मतदाताओं के बीच भी हम ऐसे वर्गों तक पहुंच रहे हैं जो कई वजह से टीएमसी के खिलाफ हैं और ऐसे वोट जो आमतौर पर सीपीएम और कांग्रेस के पास चले जाते हैं, हम उन्हें अपने साथ लाने की पूरी कोशिश कर रहे हैं।

राजनीतिक हिंसा में मारे जा रहे मुसलमान- समिक भट्टाचार्य

पश्चिम बंगाल बीजेपी के अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य कहते हैं, ‘पिछले 3 सालों में पश्चिम बंगाल में हुई राजनीतिक हिंसा में सबसे ज्यादा मौत मुसलमानों की हुई है। मुसलमान ही मुसलमानों को मार रहे हैं और ऐसा हो रहा है जबकि भारत के दूसरे राज्यों में ऐसा होता नहीं दिखता।’

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शुभेंदु अधिकारी ने भी बदला रुख

बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी ने भी अपना रुख नरम किया है। पिछले कुछ महीनों में शुभेंदु अधिकारी ने ‘सनातनी हिंदुओं’ को लेकर कई रैलियां की हैं और उन्होंने दावा किया था कि उत्तर प्रदेश, हरियाणा और महाराष्ट्र में हिंदू एकजुट हो गए हैं। बीजेपी लगातार मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और टीएमसी को हिंदू विरोधी बता रही है।

शुभेंदु अधिकारी ने तो यह बयान तक दे दिया था कि 2026 के विधानसभा चुनाव के बाद बीजेपी पश्चिम बंगाल में सरकार बनाएगी और मुस्लिम विधायकों को विधानसभा से बाहर कर देगी लेकिन बिहार में एनडीए की जीत के बाद अधिकारी ने अपना रुख बदल लिया।

शुभेंदु अधिकारी बोले- टीएमसी ने गढ़ी झूठी कहानी

शुभेंदु अधिकारी ने हाल ही में कहा, ‘टीएमसी झूठी कहानी गढ़ती है कि बीजेपी मुस्लिम विरोधी है। हम सभी समुदायों का समान विकास चाहते हैं, हमने मुसलमानों को कभी वोट बैंक के रूप में नहीं देखा। बीजेपी शासित राज्यों और देश भर में मुसलमानों के विकास के लिए उठाए गए कदमों को देखिए।’

अधिकारी कहते हैं कि भारत के मुसलमान एसआईआर का समर्थन कर रहे हैं जिसका मकसद केवल अवैध बांग्लादेशी घुसपैठियों और रोहिंग्याओं को वोटर लिस्ट से बाहर करना है। बीजेपी के एक सूत्र ने कहा, ‘हमारा मत स्पष्ट है कि हम राष्ट्रवादी भारतीय मुसलमानों के खिलाफ नहीं हैं। हम केवल घुसपैठियों, जिहादियों या रोहिंग्याओं के खिलाफ हैं।’

इसी तरह पश्चिम बंगाल बीजेपी के पूर्व अध्यक्ष राहुल सिन्हा कहते हैं, ‘हमने अपना रुख कभी नहीं बदला। हमने हमेशा कहा है कि जो मुसलमान अपने देश से प्यार करते हैं हम उनके खिलाफ नहीं हैं।’

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सीपीएम, टीएमसी ने पूछा बीजेपी से सवाल

बीजेपी नेताओं के इन बयानों को लेकर सीपीएम नेता मोहम्मद सलीम सवाल उठाते हैं। सलीम ने कहा, ‘कौन तय करेगा कि कौन राष्ट्रवादी है जो सिर्फ बीजेपी के साथ खड़े हैं, वे राष्ट्रवादी और बाकी देशद्रोही। यही बीजेपी का सिद्धांत है।’

टीएमसी के प्रवक्ता जयप्रकाश मजूमदार कहते हैं, ‘आप कैसे कह सकते हैं कि एक राष्ट्रवादी है और दूसरा नहीं… पहले बीजेपी ने हिंदुओं और मुसलमानों को बांटा। अब वे मुसलमान को राष्ट्रवादी और गैर राष्ट्रवादी में बांट रहे हैं। वे लोगों को और कितना बांटेंगे।’

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