Maharashtra Politics: महाराष्ट्र नगरपालिका चुनावों में बीजेपी द्वारा कांग्रेस और AIMIM के साथ किए गए गठबंधन को लेकर सियासी विवाद खड़ा हो गया है। अब इस मुद्दे पर सीएम देवेंद्र फड़नवीस तक को सफाई देनी पड़ी। सीएम ने कहा कि ये गठबंधन लोकल लीडरशिप ने शीर्ष नेतृत्व की मंजूरी के बिना ही किया है। उन्होंने इसको लेकर नाराजगी जताई और जिम्मेदार नेताओं के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी दी है।
बता दें कि पिछले महीने नगर निकाय चुनावों के बाद BJP ने ठाणे जिले के अंबरनाथ नगरपालिका में कांग्रेस से हाथ मिला लिया। वहीं अकोला जिले के अकोट नगरपालिका में AIMIM के साथ गठबंधन कर लिया। इस गठबंधन के चलते महायुति की सहयोगी एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना को शामिल नहीं किया।
देवेंद्र फड़नवीस बोले- ये गठबंधन स्वीकार नहीं
इतना ही नहीं, कुछ ऐसा ही अकोला में हुआ। BJP ने इसी तरह का गठबंधन अकोला जिले के अकोट नगर परिषद में भी किया, जहां उसने AIMIM और कई अन्य दलों के साथ मिलकर ‘अकोट विकास मंच’ का गठन किया गया। इन घटनाक्रमों पर प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यमंत्री फड़नवीस ने कहा कि कांग्रेस या AIMIM के साथ किसी भी तरह का गठबंधन पार्टी को स्वीकार नहीं है।
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मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस ने एक न्यूज चैनल से बातचीत में कहा, “मैं स्पष्ट कर देना चाहता हूं कि कांग्रेस या AIMIM के साथ कोई भी गठबंधन स्वीकार्य नहीं है। यदि किसी स्थानीय नेता ने अपने स्तर पर ऐसा फैसला लिया है तो यह अनुशासन के खिलाफ है और उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।”
शिवसेना को ही कर दिया बाहर
इसके अलावा सीएम फड़नवीस ने ऐसे गठबंधनों को खत्म करने के निर्देश जारी कर दिए गए हैं। अंबरनाथ नगर परिषद के 60 सदस्यीय सदन में एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना 27 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी, लेकिन बहुमत से चार सीटें पीछे रह गई।
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BJP को 14, कांग्रेस को 12, NCP को चार सीटें मिलीं, जबकि दो निर्दलीय उम्मीदवार चुने गए। एक निर्दलीय के समर्थन से BJP-कांग्रेस-NCP गठबंधन की संख्या 32 तक पहुंच गई थी। इसके चलते बीजेपी के नेताओं ने शिवसेना को ही बाहर कर दिया था। नतीजा ये BJP पार्षद तेजश्री करंजुले पाटील को नगर परिषद अध्यक्ष चुना गया, जिन्होंने शिवसेना की मनीषा वालेकर को हराया। यहां अभी उपाध्यक्ष का चुनाव बाकी है।
BJP से नाराज शिवसेना
वहीं इस गठबंधन को लेकर बीजेपी के स्थानीय BJP नेताओं ने कहा कि यह कदम स्थिर प्रशासन और शहर को “भ्रष्टाचार व दबाव” से मुक्त कराने के लिए उठाया गया। वहीं शिवसेना ने इसे “अनैतिक और अवसरवादी” करार दिया। शिवसेना विधायक डॉ. बालाजी किणीकर ने इसे “गठबंधन धर्म” के खिलाफ और BJP के “कांग्रेस-मुक्त भारत” के नारे के विपरीत बताया।
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