देश के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने साल 2004 में एक टीवी इंटरव्यू में कहा था कि गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने मना करने के बावजूद चुनावी सभाओं में तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी पर व्यक्तिगत हमला बोला था। वाजपेयी ने एनडीटीवी को दिए इंटरव्यू में कहा था कि सोनिया गांधी के विदेशी मूल का मुद्दा गलत था। उन्होंने कहा था, “यह बात सच है कि मना करने के बाद लोगों ने उस बात को दोहराई जो खेदजनक है।” हालांकि वाजपेयी ने कहा था कि चुनाव में ये मुद्दा बन गया है और इसका हल निकाला जाना चाहिए। उन्होंने विदेशी मूल के मुद्दे को बीजेपी द्वारा तूल देने के आरोपों को खारिज करते हुए कहा था कि यह मुद्दा बीजेपी ने नहीं बल्कि राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी ने उठाया था और अगर शरद पवार ने इस मुद्दे को उठाकर कांग्रेस नहीं तोड़ी होती तो ये मामला इतना बड़ा नहीं होता।
बता दें कि 2004 के चुनावों में गुजरात के तत्कालीन सीएम नरेंद्र मोदी, बीजेपी नेता विनय कटियार समेत कई नेताओं ने भी सोनिया गांधी के विदेशी मूल का मुद्दा उठाया था। मई 2004 में लोकसभा चुनावों के बाद बीजेपी नेता और मौजूदा विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने कसम खाई थी कि अगर सोनिया गांधी पीएम बन गयीं तो वो अपना सिर मुंडवा लेंगी, सादे कपड़े पहनेंगी और जिंदगी भर जमीन पर सोएंगी। सुषमा के इस विवादित बयान से वह मीडिया की सुर्खियों में छा गई थीं। सुषमा का तर्क था कि 60 साल की आजादी के बाद भी अगर कोई विदेशी मूल का शख्स देश के शीर्ष पद पर बैठता है तो इसका मतलब होगा कि 100 करोड़ लोग अक्षम हैं। सुषमा ने साल 1999 में भी सोनिया गांधी को चुनौती देते हुए बेल्लारी से उनके खिलाफ चुनाव लड़ा था लेकिन वो चुनाव हार गई थीं।
2004 के लोकसभा चुनावों में सत्ताधारी बीजेपी और एनडीए गठबंधन की हार हुई थी, जबकि कांग्रेस की अगुवाई वाले 13 दलों के गठबंधन की जीत हुई थी। मई में जब चुनावी नतीजे आए तो ऐसी संभावना जताई जा रही थी कि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी प्रदानमंत्री बनेंगी लेकिन उन्होंने पीएम नहीं बनने का फैसला लेकर सबको चौंका दिया था। तब कांग्रेस नेता और मशहूर अर्थशास्त्री मनमोहन सिंह को प्रधानमंत्री बनाया गया था।

