पश्चिम बंगाल में शनिवार को एक और बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) ने आत्महत्या कर ली। बुधवार को ही जलपाईगुड़ी में बीएलओ ने आत्महत्या की थी। 9 नवंबर से अब तक तीन बीएलओ की मौत हो चुकी है, जिनमें से दो ने आत्महत्या की है। इस तरह की घटनाओं के बाद Special Intensive Revision (SIR) के खिलाफ तृणमूल कांग्रेस ने आवाज और तेज कर दी है।
पुलिस के अनुसार, यह ताजा घटना नदिया जिले में हुई है। महिला बीएलओ के परिवार ने आरोप लगाया है कि वह SIR के काम के कारण काफी तनाव में थी और इसी वजह से उसने आत्महत्या की है।
पुलिस के मुताबिक, बीएलओ का नाम रिंकू तरफदार था और वह छपरा के कृष्णानगर स्थित बंगालझी इलाके में अपने घर के कमरे में छत से लटकी हुई मिलीं।
पुलिस ने बताया, ‘‘परिवार का दावा है कि एसआईआर से जुड़े काम के बोझ के कारण वह काफी दबाव में थी। हमें उसके कमरे से एक नोट मिला है। शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया गया है। जांच जारी है।’’
SIR के खिलाफ आंदोलन तेज करेंगी ममता बनर्जी
ममता बनर्जी ने SIR के खिलाफ विरोध प्रदर्शन तेज करने का फैसला किया है। वह मंगलवार को बनगांव में एक रैली को संबोधित करेंगी और उत्तर 24 परगना जिले में एक विरोध मार्च में हिस्सा लेकर SIR के खिलाफ आंदोलन की शुरुआत करेंगी।
‘इस्तीफा देना चाहती थी, काम का दबाव बहुत था…’
ममता ने लिखा था ज्ञानेश कुमार को पत्र
ममता बनर्जी सरकार के मंत्री उज्ज्वल विश्वास ने मृतक के घर जाकर परिजनों से मुलाकात की। इसके अलावा मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार से पश्चिम बंगाल में जारी SIR प्रक्रिया को रोकने की अपील की है।
मुख्यमंत्री ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त को गुरुवार को पत्र लिखकर कहा था कि अगर SIR की प्रक्रिया जारी रही तो इससे और ज्यादा लोगों की जान खतरे में पड़ जाएगी। बनर्जी ने कहा था कि जिस संशोधन में पहले तीन साल लगते थे, उसे अब जबरन तीन महीनों में कराया जा रहा है और इससे बीएलओ और अफसरों को मुश्किल हालात का सामना करना पड़ रहा है और आम लोग डर के माहौल में जी रहे हैं।
जलपाईगुड़ी जिले में जिस महिला बीएलओ ने आत्महत्या की थी, उसके परिवार ने भी आरोप लगाया था कि SIR के काम के बहुत ज्यादा दबाव के कारण उसने आत्महत्या की।
एमपी के दो जिलों में दो बीएलओ की मौत
मध्य प्रदेश में भी SIR के लिए सर्वे करने वाले दो बीएलओ की शुक्रवार को रायसेन और दमोह जिलों में मौत हो गई। बीएलओ के परिजनों और दोस्तों ने ज्यादा काम के दबाव को मौत की वजह बताया है। बीएलओ की पहचान रमाकांत पांडे और सीताराम गोंड के रूप में हुई है। वे दोनों रायसेन और दमोह जिलों में तैनात थे।
