दुनियाभर में कोरोनावायरस के खतरे को देखते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने ऐलान किया है कि आने वाले दिनों में केंद्र सरकार का कोई भी मंत्री विदेशी दौरों पर नहीं जाएगा। उन्होंने आगे कहा, “मैं सभी देशवासियों से अपील करता हूं कि वे गैरजरूरी यात्रा से बचें। हम बड़ी भीड़ से बच कर सभी की सुरक्षा सुनिश्चित कर सकते हैं। साथ ही संक्रमण का फैलाव भी रोक सकते हैं।”
इसी बीच भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद ने कहा है कि कोरोनावायरस का टीका बनने में अभी कम से कम 1.5 से 2 साल का समय लग सकता है।
विदेश मंत्री बोले- भारतीयों की देखरेख के लिए ईरान में क्लीनिक शुरू: इससे पहले विदेश मंत्री एस जयशंकर ने गुरुवार को लोकसभा में कहा कि कोरोनावायरस का फैलना गंभीर चिंता का विषय है। सरकार जिम्मेदारी के साथ समस्याओं को सुलझाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने लोकसभा में यह भी आश्वासन दिया कि सरकार ईरान, इटली समेत दुनिया के किसी भी भाग में रहने वाले अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।
जयशंकर ने बताया कि ईरान में अभी 6000 भारतीय नागरिक फंसे हैं। इनमें 1100 तीर्थयात्री और जम्मू कश्मीर के 300 छात्र शामिल हैं। इसके अलावा 1000 मछुआरे भी फंसे हैं। चूंकि, ईरान पहले ही पीड़ितों की बढ़ती संख्या से परेशान है, इसलिए भारतीयों की देखरेख के लिए वहां मेडिकल टीम भेजी गई है और क्लीनिक स्थापित किया गया।
जयशंकर ने कहा कि ईरान में फंसे भारतीयों में से 529 के नमूनों में 229 जांच में नकारात्मक पाये गए हैं। विदेश मंत्री ने कहा कि ईरान से 58 लोगों को लाया गया है और जल्द ही 200 अन्य लोगों को वापस लाया जाएगा। इटली में फंसे भारतीयों की मदद के लिए भी चिकित्सा दल भेजा गया है। जो जांच में नकारात्मक पाए जाएंगे, उन्हें यात्रा की अनुमति होगी। वहां नोडल ऑफिस स्थापित किया जा रहा है।
मंत्रियों का समूह रख रहा स्थिति पर नजरः जयशंकर ने कहा कि सरकार के कुछ मंत्रियों का एक समूह लगातार कोरोना वायरस की स्थिति पर निगरानी रख रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी समय-समय पर स्थिति की समीक्षा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि 15 फरवरी के बाद चीन, इटली, ईरान, कोरिया, फ्रांस, स्पेन और जर्मनी की यात्रा करने वाले भारतीय नागरिकों को 14 दिनों की न्यूनतम अवधि तक अलग रखा जायेगा।
