कांग्रेस नेता उदित राज की एक टिप्पणी से बवाल मचा हुआ है। उन्होंने यूपी की पूर्व मुख्यमंत्री और बहुजन समाज पार्टी की सुप्रीमो मायावती को लेकर एक विवादित टिप्पणी की है। उदित राज के इस बयान पर सियासी बवाल मचा हुआ है। बसपा चीफ के भतीजे और पार्टी के नेशनल कोआर्डिनेटर आकाश आनंद ने यूपी पुलिस को 24 घंटे का अल्टीमेटम दिया है। वहीं मायावती ने भी इस बयान को लेकर नाराजगी जाहिर की है।

आकाश आनंद ने सोशल एक्स पर पोस्ट किया कि ‘मैं यूपी पुलिस से साफ कहना चाहता हूं कि 24 घंटे में इन अपराधियों को गिरफ्तार कर क़ानून के तहत कड़ी से कड़ी कार्यवाही करें नहीं तो देश का बहुजन युवा चुप बैठने वाला नहीं है, इनको सबक सिखाना मुझे अच्छे से आता है। वहीं इस मामले में बसपा सुप्रीमो मायावती का भी रिएक्‍शन सामने आया है। मायावती ने कहा है कि कुछ दलबदलू, अवसरवादी और स्वार्थी दलित लोग अपने आक़ाओं को खुश करने के लिए जो अनर्गल बयानबाजी आदि करते रहते हैं उनसे भी बहुजन समाज को सावधान रहने और उन्हें गंभीरता से नहीं लेने की जरूरत है। क्योंकि वे ’सामाजिक परिवर्तन और आर्थिक मुक्ति’ मूवमेन्ट से अनभिज्ञ और अपरिचित हैं।

उदित राज ने क्या दिया था बयान

उदित राज ने सोमवार को ‘एक्‍स’ पर अपने वीडियो पोस्‍ट में कहा, ‘कृष्ण ने कहा था कि न्याय के लिए लड़ो, जरूरत पड़े तो अपने सगे संबंधियों को भी मार दो। बसपा की प्रमुख मायावती ने जो सामाजिक आंदोलन का गला घोंटा है, अब उनका गला घोंटने का वक्त आ गया है।’

मायावती ने क्या कहा?

मायावती ने इस मामले में उदित राज पर निशाना साधते हुए कहा कि बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर के जीतेजी और उनके देहान्त के बाद भी, करोड़ों शोषित-पीड़ित दलितों, बहुजनों के लिए उनके आत्म-सम्मान एवं स्वाभिमान के मानवतावादी संघर्ष का हर स्तर पर तिरस्कार करने वाली खासकर कांग्रेस पार्टी कभी भी इनकी सोच-नीतियों पर खरी और विश्वसनीय नहीं हो सकती। अतः विशुद्ध राजनीतिक और चुनावी स्वार्थ के लिए कांग्रेस ’ जय बापू, जय भीम, जय मण्डल, जय संविधान’ आदि के नाम पर चाहे जितने भी कार्यक्रम क्यों न कर ले, बाबा साहेब के अनुयाई इनके किसी बहकावे में आने वाले नहीं हैं। वे जागरुक व सतर्क तथा अपने पैरों पर खड़े होने के लिए संघर्षरत हैं।

उन्‍होंने आगे लिखा, ‘ कुछ दलबदलू अवसरवादी व स्वार्थी दलित लोग अपने आक़ाओं को खुश करने के लिए जो अनर्गल बयानबाजी आदि करते रहते हैं उनसे भी बहुजन समाज को सावधान रहने व उन्हें गंभीरता से नहीं लेने की जरूरत है क्योंकि वे ’सामाजिक परिवर्तन व आर्थिक मुक्ति’ मूवमेन्ट से अनभिज्ञ व अपरिचित हैं।’