यूरोपीय संघ (ईयू) के 23 सांसदों का एक शिष्टमंडल जम्मू कश्मीर में हालात का जायजा लेने के लिए मंगलवार को दो दिवसीय दौरे पर यहां पहुंचा। वहीं, बंद के बीच घाटी और शहर के विभिन्न हिस्से में लोगों और सुरक्षा बलों के बीच झड़पें हुईं।हवाई अड्डे से होटल तक के रास्ते में बुलेट प्रूफ जीपों में यात्रा कर रहे सांसदों की हिफाजत के लिए सुरक्षा वाहनों का एक काफिला भी था। सांसदों के होटल पहुंचने पर कश्मीर की परंपरा के अनुसार उनका स्वागत किया गया।

जम्मू कश्मीर के मुख्य सचिव बी वी आर सुब्रमण्यम और पुलिस प्रमुख दिलबाग सिंह ने घाटी और जम्मू कश्मीर के अन्य हिस्से में हालात पर शिष्टमंडल को अवगत कराया। पांच अगस्त को जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 के अधिकतर प्रावधान हटाने और राज्य को दो केंद्रशासित प्रदेशों में विभाजित करने की केंद्र सरकार की घोषणा के बाद यह पहला उच्च स्तरीय विदेशी शिष्टमंडल कश्मीर के दौरे पर आया है। इस मुद्दे को लेकर टीवी चैनल्स पर बहस हो रही थी। इस दौरान एक चैनल पर बहस  के दौरान पैनलिस्ट कश्मीरी कार्यकर्ता पर भड़क गए।(12वें मिनट से देखें)

दरअसल कश्मीरी कार्यकर्ता ललित अंबरदार ने कहा कि कश्मीर में 30 साल से आतंकवाद है। कश्मीर के मुद्दे को यूएन में लेकर कौन गया। कश्मीर का मुद्दा यूएन में जवाहलाल नेहरू की वजह से यूएन में गया। इस मुद्दे पर BRICS के संस्थापक निशांत वर्मा भड़क गए और बोले हमेशा कहा जाता है कि मोदी का विरोध किया जा रहा है। मैं यह कहना चाहता हूं कि अगर ये मोदी देशविरोध करेगा तो दोबारा प्रधानमंत्री के लिए यह मत कहना कि मोदी विरोध ना करो।