केंद्र सरकार के तीन नए कृषि बिलों के खिलाफ किसान सड़कों पर हैं। किसानों ने इन बिलों को वापस लेने की मांग की है। अन्नदाताओं की एक मांग ये भी है कि उन्हें एमएसपी यानी न्यूनतम समर्थन मूल्य की गांरटी दी जाए। इस बीच टीवी चैनल एबीपी न्यूज की सीनियर एंकर रूबिका लियाकत इसी मुद्दे पर कथित तौर पर सरकार का बचाव करने पर निशाने पर आ गईं। उन्होंने डिबेट शो ‘मास्टर स्ट्रोक’ में कहा कि सरकार एमएसपी पर कानून बनाने से इसलिए बच रही है क्योंकि इससे सरकार पर आर्थिक बोझ बढ़ेगा। न्यूज एंकर ने कहा कि अगर सभी फसलों के दाम पहले से तय हो जाएं तो अर्थव्यवस्था कैसे चलेगी।
एमएसपी पर सरकार का बचाव करने पर रुबिका लियाकत पर पत्रकार रोहिणी सिंह ने निशाना साधा। उन्होंने ट्वीट कर कहा कि जब पत्रकार सरकार की लिखी प्रेस रिलीज सुनाए तो लोकतंत्र का कमजोर होना लाजमी है। उन्होंने कहा, ‘रुबिका लियाकत बता रही हैं कि किसानों को MSP देने से अर्थव्यवस्था की कमर टूट जाएगी। पत्रकारिता के भेष में बैठे ‘पार्टी प्रवक्ताओं’ को पहचानिए।’
इस ट्वीट के बाद एंकर और पत्रकार आपस में भिड़ गए। रुबिका ने भी रोहिणी को जवाब दिया। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि ‘इस महिला को मैं वैसे तो जानती नहीं लेकिन जब भी यूपी की एक क्षेत्रीय पार्टी का जिक्र करती हूं तो बेचैन होकर अनायास ही मेरे टाईम लाइन पर कूद पड़ती हैं….बड़ा ही ‘फ़्लैट’ सा संयोग है।’
जब पत्रकार सरकार द्वारा लिखी गयी ‘प्रेस रिलीज’ पढ़ कर सुनाने लगें तब लोकतंत्र कमजोर होना लाजमी है। यहाँ @RubikaLiyaquat बता रही हैं कि किसानों को MSP देने से अर्थव्यवस्था की कमर टूट जाएगी।
पत्रकारिता के भेष में बैठे ‘पार्टी प्रवक्ताओं’ को पहचानिए।
pic.twitter.com/3Blb5BsfCC— Rohini Singh (@rohini_sgh) December 8, 2020
रोहिणी ने इस पर पलटवार करते हुए कहा, ‘माफ कीजिएगा रुबिका जी, आपको ‘पार्टी प्रवक्ता’ कह कर वाक़ई में मैंने आपके व्यक्तित्व के साथ न्याय नहीं किया। आपके तर्कों और चाटुकारिता का स्तर देख कर आपको ‘ट्रोल’ कहना ही उचित होगा। ‘मोदी जी आप थकते क्यूं नहीं हैं’ वाली पत्रकारिता आपको मुबारक। भारत किसानों के साथ है।’ दोनों ने नोकझोंक ने सोशल मीडिया यूजर्स भी जमकर प्रतिक्रियाए दें रहे हैं।
इस महिला को मैं वैसे तो जानती नहीं लेकिन जब भी यूपी की एक क्षेत्रीय पार्टी का ज़िक्र करती हूँ तो बेचैन होकर अनायास ही मेरे टाईम लाइन पर कूद पड़ती हैं….बड़ा ही ‘फ़्लैट’ सा संयोग है… https://t.co/1eARyQdPrC
— Rubika Liyaquat (@RubikaLiyaquat) December 8, 2020
एक यूजर @theskindoctor13 लिखते हैं, ‘ऐसे सारे आम बेज्ज़ती तो मत कीजिए। कहीं रोष व्यक्त करने के लिए फ्लैट वापसी का ऐलान ना कर दें। आजकल वैसे ही अवार्ड वापसी का सीजन चल रहा है।’ इस ट्वीट के जवाब में चंद्रशेखर @imphilospher लिखते हैं, ‘तुमको जब मिलेगा अवार्ड तो तुम वापस मत करना, कुंडली मार के बैठ जाना। भारतीय संस्कृति में हमेशा त्याग को ऊंचा स्थान मिलता है। राज्य द्वारा दिए गए अवार्ड को वापस करना राज्य के समक्ष अपना प्रतिरोध दर्शाना है। यह सबका अधिकार भी है और लोकतंत्र में उचित भी।’
माफ कीजिएगा @RubikaLiyaquat जी, आपको ‘पार्टी प्रवक्ता’ कह कर वाक़ई में मैंने आपके व्यक्तित्व के साथ न्याय नहीं किया।
आपके तर्कों और चाटुकारिता का स्तर देख कर आपको ‘ट्रोल’ कहना ही उचित होगा।
‘मोदी जी आप थकते क्यूँ नहीं हैं’ वाली पत्रकारिता आपको मुबारक।
भारत किसानों के साथ है। https://t.co/h7HDTVSrHW
— Rohini Singh (@rohini_sgh) December 8, 2020
तेजस्वी समर्थक @yadavmanish09 नाम से एक यूजर लिखते हैं, ‘कभी खेत गई हो? कभी हल उठाई हो? और आ गईं किसानो के समस्या पर ज्ञान उड़ेलने, बंद कमरे में सरकार की रटी रटाई स्क्रिप्ट कैमरे के सामने पढ़ना आसान है।’ जाकर ज़रा किसानो के बीच उन्हें ये समझाइए वो पक्का आपको खेती सिखा देंगे।’ एजी @ArnabGohil लिखते हैं, ‘ वैसे तो इन्हें हम पत्रकार के तौर पर जानते हे, लेकिन जब भी सरकार से कोई सवाल करना होता है तो ये टॉनिक का सवाल कर के फिटनेस ट्रेनर बन जाती हैं और विपक्ष को हमेशा कटघरे में करती हैं।
