पंकज रोहिला
देश में छोटे-छोटे रोजगार से युवा वर्ग के लिए 19.5 करोड़ नए रोजगार के रास्ते खुले हैं। रोजगार बढ़ने के ये संकेत प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के ताजा आंकड़ों से सामने आए हैं। हाल ही में इस योजना को लागू करने के बाद देश में रोजगार को एक सर्वे कराया गया है। इसमें सामने आया है कि प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के माध्यम से देश में औसतन 1.6 लोगों को रोजगार पाने में सफलता मिली है। दिल्ली व आसपास के राज्यों में इन रोजगार के आंकड़े करीब 25 लाख के आसपास आंके गए हैं। युवाओं को रोजगार से जोड़ने वाली इस योजना के तहत केंद्र सरकार तीन स्तर के कर्ज उपलब्ध करा रही है। लोक नीति शोध केंद्र के निदेशक डॉ. सुमित भसीन बताते हैं कि सर्वे में सामने आया है कि जिन छोटे-छोटे रोजगार के लिए इस नीति को तैयार किया गया था। इसके तहत सबसे छोटे तबके तक के लोगों को इसका लाभ मिल रहा है। अब तक सामने आए आंकड़े बताते हैं कि केवल दिल्ली में ही मुद्रा लोन योजना के तहत 10 लाख रोजगार उपलब्ध कराए गए हैं। जबकि पांच लाख रोजगार फरीबाद, गुड़गांव व बहादुर गढ़ क्षेत्र और 10 लाख लोगों को मुद्रा योजना के तहत नोएडा, गे्रटर नोएडा व गाजियाबाद इलाकों में कर्ज उपलब्ध कराया गया है।
सरकारी आंकड़ों के आधार पर यह रिपोर्ट सामने आई है। शोधकर्ता विदुषी साहनी ने बताया कि सरकार ने यह योजना अप्रैल 2015 में शुरू की थी। रिपोर्ट में नवंबर 2018 तक रोजगार की स्थिति का आकलन किया गया है। इसमें उन लोगों से बात की गई है जिन्होंने प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के तहत कर्ज लिया और उससे अपने रोजगार की शुरुआत की। इसके सैम्पल सर्वे दिल्ली के मॉडल टाउन, उत्तम नगर, भीकामाजी प्लेस, सदर बाजार, पुराना राजेंद्र नगर जैसे इलाकों में किए गए हैं।
रिपोर्ट बताती है कि प्रधानमंत्री मुद्रा योजना से मिले कर्ज से आम जनता ने कोचिंग सेंटर, ई रिक्शा, छोटी दुकान आदि खोली है। इसके लिए शोध केंद्र ने इन राज्यों में सैम्पल सर्वे भी किए हैं। इस योजना के तहत तीन श्रेणियों में कर्ज उपलब्ध कराए जा रहे हैं। शिशु श्रेणी के लिए 50 हजार, किशोर के लिए 50 हजार से पांच लाख और तरुण वर्ग के लिए यह पांच लाख से 10 लाख रुपए है। इस कर्ज के माध्यम से कोई भी नागरिक मैनुफैक्चरिंग यूनिट, सेवा क्षेत्र में कार्य, फूड सर्विस केंद्र, फल या सब्जी, दुकान या छोटे उद्योग आदि की श्रेणी का कार्य कर सकता है।

