श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने अयोध्या में 70 एकड़ में बनाए जा रहे राम मंदिर से जुड़ी परियोजनाओं के लिए सुझाव मांगे हैं। ट्रस्ट का कहना है कि लोगों के ये सुझाव धार्मिक यात्रा, परंपरा, संस्कृति एवं विज्ञान से जुड़े होने चाहिए। ट्रस्ट का कहना है कि परियोजना के बारे में व्यक्ति, विषयों के जानकार, ऑर्किटेक्स, डिजाइनर अपने सुझावों को 25 नवंबर तक उसके पास भेज सकते हैं। मंदिर का डिज़ाइन, मुख्य संरचना, पारंपरिक नागरा शैली में बनाई जा रही है, जिसे विशेषज्ञ सलाहकारों द्वारा डिज़ाइन किया गया है।
इस सप्ताह के शुरू में अयोध्या में मंदिर निर्माण की प्रगति पर सदस्यों से मुलाकात और विचार-विमर्श के बाद ऐसा किया गया है। रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से कहा गया है कि जो भी मंदिर परिसर के निर्माण संबंधी सुझाव दे रहे हैं, वे 25 नवंबर 2020 तक इसे भेज दें। इसके लिए बकायदा तीन ईमेल एड्रेस भी बताए गए हैं, जिन पर सुझाव भेजने हैं।
ट्रस्ट ने एक स्वैच्छिक आधार पर लोगों से सुझाव और डिजाइन मांगे हैं, जो पुष्करणी, यज्ञ मंडपम, अनुष्ठान मंडपम, कल्याण मंडपम जैसी सुविधाओं के लिए और रामजन्मोत्सव, हनुमान जयंती, रामचरित, सीता विवाह जैसे अनुष्ठानों के उत्सव के लिए मंदिर के साथ जुड़ना चाहते हैं।
ट्रस्ट की ओर से दिए गए विज्ञापन में कहा गया है कि डिजाइन वास्तु या स्थापन वेद पर आधारित होना चाहिए, जिसे भारतीय वास्तुकला विज्ञान के रूप में जाना जाता है। ट्रस्ट को अनुमान है कि करीब 1 लाख भक्त प्रति दिन और खास दिनों पर 5 लाख भक्त दर्शन करने आएंगे। इसी को नजर में रखते हुए ट्रस्ट ने आगंतुक सुविधाओं के लिए भी डिजाइन मांगा है।
इसके अलावा ट्रस्ट की तरफ से श्रीराम डिजिटल लाइब्रेरी एंड रिसर्च सेंटर के साथ-साथ मल्टीमीडिया प्लेटफॉर्म, वर्चुअल रियलिटी, संवर्धित वास्तविकता दिखाने वाले म्यूजियम के लिए भी डिजाइन चाहता है जो 1,000 से 5,000 व्यक्तियों की क्षमता वाले ऑडिटोरियम और कन्वेंशन सेंटर में पूर्ण यात्रा कार्यक्रम के साथ रामायण के सार और चित्रण करेगा।
बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गत पांच अगस्त को राम मंदिर निर्माण के लिए अयोध्या में पूजन किया था। कोरोना के प्रभाव को देखते इस भूमि पूजन समारोह के लिए ट्रस्ट ने कम अतिथियों को आमंत्रित किया था। सुप्रीम कोर्ट ने 8 नवंबर 2019 को अपने ऐतिहासिक फैसले में विवादित 2.77 एकड़ जमीन पर राम मंदिर निर्माण का फैसला दिया था।
