Atal Bihari Vajpayee Punyatithi: पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की पुण्यतिथि 16 अगस्त को है। राजनीति के अजातशत्रु कहे जाने वाले वाजपेयी के मुरीद हर दल के नेता थे। इसकी वजह उनकी जिंदादिली थी। वाजपेयी खानपान के शौकीन तो थे ही, उन्हें खाना बनाने का भी चाव था। शुरुआत में शाकहारी रहे वाजपेयी बाद में नॉनवेज भी पसंद करने लगे थे।

एक राजनयिक दौरे पर जब अटल जी खाने की तरफ जाने लगे तो उन्हें मीठा खाने से रोकने के लिए उनके सहयोगियों को माधुरी दीक्षित की मदद लेनी पड़ी। दरअसल, वाजपेयी जी को मिठाइयां इतनी पसंद थीं कि वो प्रोटोकॉल तोड़कर खाने के लिए पहुंचने वाले थे। तब माधुरी दीक्षित से मुलाकात के बहाने उन्हें कुछ देर के लिए रोका गया। उधर, बातचीत में वे मशगूल हुए इधर तब तक टेबल से सभी मिठाइयाँ हटा दी गईं।

कानपुर और ग्वालियर में लंबा वक्त बिताने वाले वाजपेयी को यहां के देशज व्यंजन खूब पसंद थे। कहते हैं कि दोनों शहरों की कोई ऐसी गली नहीं थी जिसकी खाक खानपान के चक्कर में वाजपेयी ने छानी ना हो।

भिंड-मुरैना की गजक हो या ठग्गू के लड्डू के साथ बदनाम कुल्फी, खीर मालपुआ…ये सब वे बड़े ही चाव से खाते थे। मीठे पकवान एक तरह से उनकी कमजोरी थे। वे जहाँ भी जाते थे तो वहाँ के स्थानीय भोजन का ज़ायका अवश्य लेते थे।

उनके एक करीबी सहयोगी के मुताबिक जब वे लखनऊ आते तो लाल जी टंडन उनके लिए चौक इलाके से कबाब जरूर ले कर आते थे। वहीं, दिल्ली में विजय गोयल उनके लिए स्पेशल चाट पैक करवा कर लाते थे।

मशहूर शेफ सतीश अरोरा के मुताबिक “वे एक बार अटल जी के लिए पानी पूरी ले गये, तब अटल जी ने उनसे प्लेट ले ली और बोले- सतीश आज पानी पूरी मैं बनाऊंगा।”

रिपोर्ट के मुताबिक अटल जी को झींगा मछली खूब पसंद थी। वर्तमान में उपराष्ट्रपति और अटल जी के करीबी रहे वेंकैया नायडू जब भी आंध्र से दिल्ली लौटते तो उनके लिए झींगा जरूर लाते। उन्हें सी फूड भी बेहद पसंद था।

हैदराबाद की बिरयानी, हलीम और कोलकाता का फुचका भी शौक से खाते थे।

कई मौकों पर वे भांग भी पसंद करते थे। उज्जैन से उनके लिए स्पेशल भांग मंगवाई जाती थी, जिसका वे बादाम और दूध के साथ ठंडाई में खूब आनंद लिया करते थे। उन्होंने अपने इस शौक को कभी किसी से छिपाया नहीं।

इमरजेंसी के दौरान जेल में वे आडवाणी, श्यामनंदन मिश्र और मधु दंडवते के लिए खुद खाना बनाया करते थे।

पत्रकारिता से सियासत में आए वाजपेयी भले ही प्रधानमंत्री बन गए लेकिन उनकी आखिर तक पत्रकारों से वैसे ही दोस्ती रही। उनके घर खाने-खिलाने वालों का आना जाना लगा रहता था।