सबरीमाला गोल्ड चोरी मामले में एसआईटी ने सबरीमाला के पूर्व मुख्य पुजारी (तंत्री) कंदारारू राजीवू से पूछताछ शुरू कर दी है। केरल पुलिस के अनुसार, तंत्री को हिरासत में लिया गया है और उनसे मामले को लेकर सवाल-जवाब किए जा रहे हैं।

यह कार्रवाई मंदिर परिसर से कीमती सोने के आभूषणों के गायब होने की जांच के दौरान की गई है। पिछले दिनों मंदिक के अदंर गोल्ड चोरी का मामला सामने आया था, जिसके बाद जांच शुरू हुई थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए सरकार ने SIT बनाई थी।

जांच में सामने आया कि चोरी की घटना मंदिर के अंदरूनी पक्ष से जुड़ी हो सकती है। पूर्व मुख्य पुजारी कंडारारू राजीवारू, जो मंदिर के सबसे वरिष्ठ धार्मिक अधिकारी हैं और जिनकी पूजा सामग्री और आभूषणों तक सीधे पहुंच है, उनसे विशेष पूछताछ की जा रही है। एसआईटी को संदेह है कि वे इस मामले में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

पुजारी की हिरासत ने पूरे मामले को और ज्यादा संवेदनशील बना दिया है। इसके अलावा, अन्य कर्मचारियों और अधिकारियों से भी पूछताछ जारी है। सबरीमाला मंदिर न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि राजनीतिक दृष्टि से भी यह मामला काफी संवेदनशील माना जा रहा है।

सबरीमाला मंदिर की कहानी: उत्पत्ति और मान्यताएं

सबरीमाला केरल के पथानामथिट्टा जिले में एक पहाड़ी की चोटी पर स्थित एक प्रसिद्ध हिंदू मंदिर है। यह पेरियार बाघ अभ्यारण्य में स्थित 18 पहाड़ियों से घिरा हुआ है। यह मंदिर विकास के देवता अय्यप्पा को समर्पित है। यह मंदिर केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश के साथ-साथ देश और दुनिया के विभिन्न हिस्सों से तीर्थयात्रियों को आकर्षित करता है। मंदिर में केवल नवंबर-दिसंबर में मंडलपूजा, 14 जनवरी को मकर संक्रांति और 14 अप्रैल को महा विश्व संक्रांति के दिनों में और प्रत्येक मलयालम महीने के पहले पांच दिनों में ही पूजा-अर्चना की अनुमति है।

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सबरीमाला एक प्राचीन मंदिर है। स्थापना के बाद लगभग तीन शताब्दियों तक यह मंदिर लगभग दुर्गम रहा। 12वीं शताब्दी में, पंडालम वंश के राजकुमार मणिकंदन ने सबरीमाला तक पहुँचने के मूल मार्ग का पुनः पता लगाया। उनके साथ कई अनुयायी थे, जिनमें वावर (एक मुस्लिम योद्धा जिसे मणिकंदन ने परास्त किया था) परिवार के वंशज भी शामिल थे। इस राजकुमार को अय्यप्पा का अवतार माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि उन्होंने सबरीमाला मंदिर में ध्यान किया और ईश्वर में विलीन हो गए।

सबरीमाला के तीर्थयात्रियों को जंगल में कठिन पैदल यात्रा करके मंदिर तक पहुंचना पड़ता है क्योंकि वहां तक ​​वाहन नहीं पहुंच सकते हैं। सबरीमाला जाने से पहले तीर्थयात्रियों को 41 दिनों तक ब्रह्मचर्य का पालन करना होता है। उन्हें सख्ती से शाकाहारी भोजन का पालन करना, शराब से परहेज करना, अपशब्दों का प्रयोग न करना और बालों व नाखूनों को बिना काटे बढ़ने देना अनिवार्य है। उनसे दिन में दो बार स्नान करने और नियमित रूप से स्थानीय मंदिरों में दर्शन करने की अपेक्षा की जाती है। वे काले या नीले रंग के कपड़े पहनते हैं, तीर्थयात्रा पूरी होने तक दाढ़ी नहीं बनाते हैं और अपने माथे पर विभूति या चंदन का पेस्ट लगाते हैं।

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