Chhattisgarh News: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के मैग्नेटो मॉल में क्रिसमस की सजावट में तोड़फोड़ के आरोप में गिरफ्तार किए गए बजरंग दल के छह सदस्यों को बुधवार को सत्र न्यायालय से जमानत मिल गई। जमानत मिलने के बाद उनका “नायकों जैसा स्वागत” किया गया।

गुरुवार को जब आरोपी रायपुर सेंट्रल जेल से बाहर आए, तो बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने फूल चढ़ाकर और “रघुपति राघव राजा राम” के नारे लगाकर उनका स्वागत किया। इस मौके पर जुलूस भी निकाला गया। कार्यकर्ताओं ने छहों आरोपियों को कंधों पर उठाकर शहर में घुमाया और उनकी रिहाई का जश्न मनाया।

इस पूरे मामले पर बजरंग दल के राज्य समन्वयक ऋषि मिश्रा ने कहा कि जुलूस निकालने में कुछ भी गलत नहीं है। उनका कहना था कि यह मामला छत्तीसगढ़ में हो रहे कथित धर्मांतरण से जुड़ा है। उन्होंने आरोप लगाया कि साजिश के तहत उनके सदस्यों को जेल भेजा गया, इसलिए इस मुद्दे पर नारे लगाए जा रहे हैं। गौरतलब है कि इससे पहले 29 दिसंबर को रायपुर की एक मजिस्ट्रेट अदालत ने इन आरोपियों की जमानत याचिका खारिज कर दी थी।

क्रिसमस की पूर्व संध्या पर दक्षिणपंथी संगठनों ने छत्तीसगढ़ में कथित धर्मांतरण के विरोध में एक दिन के बंद का आह्वान किया था। उनका दावा था कि राज्य में जबरन धर्मांतरण कराया जा रहा है।

इसी दिन लकड़ी के डंडे लेकर एक भीड़ रायपुर के पुराने और लोकप्रिय मैग्नेटो मॉल में घुस गई। भीड़ ने वहां लगी क्रिसमस की सजावट और अन्य सामान को तोड़ दिया। मॉल में सांता क्लॉज़, बारहसिंगा, स्लेज और स्नोमैन की आकृतियां लगाई गई थीं। मॉल के सुरक्षा गार्डों ने भीड़ को रोकने की कोशिश की, लेकिन वे असफल रहे।

घटना के बाद उसी रात तेलीबांधा थाना में 30-40 अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई। यह एफआईआर अतिक्रमण, जानबूझकर संपत्ति को नुकसान पहुंचाने, चोट पहुंचाने, दंगा करने और गैरकानूनी सभा से जुड़ी धाराओं में दर्ज की गई है।

27 दिसंबर को तेलीबांधा पुलिस ने इस मामले में छह लोगों को गिरफ्तार किया और एक नाबालिग को हिरासत में लिया। गिरफ्तार किए गए छह लोगों को पांच दिन तक जेल में रहना पड़ा।

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गिरफ्तारी के विरोध में करीब 300 बजरंग दल कार्यकर्ता तेलीबांधा थाना के बाहर मुख्य सड़क पर धरने पर बैठ गए। इस वजह से लगभग नौ घंटे तक यातायात बाधित रहा। हालांकि, इस प्रदर्शन के मामले में कोई एफआईआर दर्ज नहीं की गई।

सर्व हिंदू समाज द्वारा 24 दिसंबर को बुलाया गया ‘छत्तीसगढ़ बंद’ बस्तर क्षेत्र के कांकेर जिले में एक धर्मांतरित परिवार के व्यक्ति के अंतिम संस्कार को लेकर दो समुदायों के बीच हाल ही में हुए संघर्ष के कारण भड़का था।

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