सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को मध्य प्रदेश सरकार को निर्देश दिया कि वह मंत्री कुंवर विजय शाह के खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी पर फैसला करे। मामला कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर की गई उनकी आपत्तिजनक टिप्पणियों से जुड़ा है। कर्नल कुरैशी ने पिछले साल पाकिस्तान के खिलाफ हुए ऑपरेशन सिंदूर के दौरान मीडिया को जानकारी दी थी।

बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, सीजेआई सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने सवाल किया कि राज्य सरकार विशेष जांच दल (SIT) की रिपोर्ट पर महीनों से फैसला क्यों नहीं ले रही है। अदालत ने कहा कि SIT की रिपोर्ट 19 अगस्त 2025 से सरकार के पास है, लेकिन अब जनवरी आ जाने के बावजूद कोई निर्णय नहीं लिया गया।

शीर्ष अदालत ने SIT की सीलबंद रिपोर्ट खोली और पाया कि जांच के बाद SIT ने मंत्री कुंवर विजय शाह के खिलाफ मुकदमा चलाने की अनुमति मांगी है। अदालत ने साफ कहा कि कानून के मुताबिक राज्य सरकार को इस पर फैसला लेना ही होगा।

राज्य सरकार ने पहले दलील दी थी कि मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित होने के कारण उसने कोई कदम नहीं उठाया। इस पर अदालत ने मध्य प्रदेश सरकार को तुरंत कानून के अनुसार कार्रवाई करने का निर्देश दिया।

जब मंत्री की ओर से वकील ने कहा कि कुंवर विजय शाह ने पहले ही माफी मांग ली है, तो अदालत ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि रिकॉर्ड में ऐसी कोई माफी मौजूद नहीं है और अब बहुत देर हो चुकी है।

कर्नल सोफिया कुरैशी उन सैन्य अधिकारियों में शामिल थीं जिन्होंने भारत की सीमा पार सैन्य कार्रवाई ऑपरेशन सिंदूर की जानकारी मीडिया को दी थी। यह अभियान 22 अप्रैल को हुए पहलगाम आतंकी हमले के बाद चलाया गया था, जिसमें 26 भारतीय नागरिकों की मौत हुई थी।

मंत्री शाह ने कथित तौर पर यह कहकर विवाद खड़ा कर दिया था, “जिन लोगों ने हमारी बेटियों को विधवा बनाया, उन्हें सबक सिखाने के लिए हमने उन्हीं की एक बहन को भेजा।” इस टिप्पणी को व्यापक रूप से कर्नल कुरैशी और उनके धर्म के प्रति एक अप्रत्यक्ष संकेत के रूप में देखा गया।

यह विवादास्पद टिप्पणी शाह ने अंबेडकर नगर (महो) के रायकुंडा गांव में एक सार्वजनिक कार्यक्रम में की थी, जिसकी व्यापक आलोचना हुई और उन्हें पद से बर्खास्त करने की मांग उठाई गई।

इसके बाद, मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए शाह की टिप्पणियों पर कड़ी आपत्ति जताई और पुलिस को शाह के खिलाफ प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR) दर्ज करने का आदेश दिया।

हाई कोर्ट ने कहा कि उनकी टिप्पणियां न केवल संबंधित अधिकारी के लिए बल्कि स्वयं सशस्त्र बलों के लिए भी अपमानजनक और खतरनाक हैं। हाई कोर्ट के जज अतुल श्रीधरन ने पुलिस को चेतावनी दी कि इस न्यायालय के आदेश को लागू कराने के लिए, यदि आवश्यक हुआ तो मैं हर संभव प्रयास करूंगा।

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14 मई की देर रात शाह के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई। पुलिस ने उन पर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 152, 196(1)(बी) और 197(1)(सी) के तहत मामला दर्ज किया। ये धाराएं राष्ट्रीय संप्रभुता को खतरे में डालने और अलग-अलग समूहों के बीच दुश्मनी फैलाने से जुड़ी हैं।

इसके बाद शाह ने हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। 16 मई 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने उनकी टिप्पणियों पर सख्त नाराजगी जताई और उनकी माफी स्वीकार करने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने एफआईआर पर रोक लगाने से भी मना कर दिया। हालांकि, कोर्ट ने मामले की जांच के लिए एसआईटी गठित करने का आदेश दिया और फिलहाल शाह को गिरफ्तारी से राहत दी।

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