जालंधर की एक अदालत ने गुरुवार को दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री आतिशी के एक वीडियो को तत्काल हटाने और ब्लॉक करने का आदेश कई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को दिया है। आरोप है कि इस वीडियो में आतिशी को नौवें सिख गुरु तेग बहादुर के बारे में विवादास्पद टिप्पणी करते हुए दिखाया गया था।
जालंधर साइबर क्राइम पुलिस की याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने पाया कि इस वीडियो का प्रसार पंजाब में सार्वजनिक व्यवस्था और धार्मिक सद्भाव के लिए खतरा पैदा करने वाला है।
अपने आदेश में अदालत ने सूचना प्रौद्योगिकी नियम, 2021 के नियम 3(डी) का हवाला देते हुए मेटा (फेसबुक और इंस्टाग्राम), एक्स और टेलीग्राम को विशिष्ट यूआरएल से जुड़ी सामग्री को हटाने का निर्देश दिया। अदालत ने कहा कि आदेश पारित होने के 24 घंटे के अंदर ऐसा किया जाए। जालंधर पुलिस ने इस कॉन्टेंट के ‘यूआरएल’ को ब्लॉक करने का निर्देश हेतु अदालत में याचिका दायर की थी।
मुश्किल में दिल्ली की पूर्व सीएम आतिशी
अदालत ने कहा है कि फॉरेंसिक रिपोर्ट से यह स्थापित होता है कि वीडियो के साथ छेड़छाड़ की गई है और वीडियो क्लिप की जांच से पता चलता है कि इसमें मौजूद कॉन्टेंट से सार्वजनिक शांति भंग हो सकती है।
जालंधर पुलिस ने दर्ज की थी एफआईआर
जालंधर पुलिस ने पिछले सप्ताह दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी की विधायक आतिशी का वीडियो अपलोड करने और वायरल करने के संबंध में एफआईआर दर्ज की थी। यह एफआईआर इकबाल सिंह की शिकायत पर दर्ज की गई थी।
इकबाल सिंह ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म ‘एक्स’ और मेटा पर कुछ हैंडल और अकाउंट वाले यूजर्स द्वारा परेशान करने वाले और गलत कैप्शन के साथ एक वीडियो का उल्लेख किया था।
जालंधर पुलिस ने अदालत से कहा था कि इस पोस्ट से पंजाब में सांप्रदायिक सद्भाव बिगड़ सकता है और सार्वजनिक व्यवस्था बाधित हो सकती है।
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आतिशी के बयान पर हुआ था विवाद
आतिशी के बयान से राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया था। भाजपा ने आरोप लगाया था कि दिल्ली विधानसभा में विपक्ष की नेता ने गुरु तेग बहादुर का अपमान किया है। दिल्ली में बीजेपी के विधायकों ने आरोप लगाया है कि आतिशी ने पिछले साल नवंबर में दिल्ली सरकार द्वारा गुरु तेग बहादुर के 350वें शहादत दिवस के सिलसिले में आयोजित एक कार्यक्रम को लेकर हुई विशेष चर्चा के बाद असंवेदनशील टिप्पणी की थी।
दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधन समिति ने आतिशी के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी जबकि हरियाणा गुरुद्वारा प्रबंधन समिति ने अमृतसर स्थित अकाल तख्त से उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी।
