Allahabad High Court: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने हाल ही में राज्य की जन्म प्रमाण पत्र जारी करने के सिस्टम की कड़ी आलोचना की है। हाई कोर्ट को जब पता चला कि एक याचिकाकर्ता ने दो अलग-अलग जन्म प्रमाण पत्र प्राप्त किए थे, जिनमें जन्म की तारीखें बिल्कुल अलग-अलग थीं।
लाइल लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक, जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस अनीश कुमार गुप्ता की पीठ ने कहा कि यह सिस्टम ” सभी स्तरों पर मौजूद बेईमानी की हद ” को उजागर करती है, इसलिए चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव को यह सुझाव देने के लिए बुलाया गया है कि एक व्यक्ति को केवल एक ही जन्म प्रमाण पत्र जारी किया जाए।
पीठ ने 18 नवंबर को पारित आदेश में टिप्पणी करते हुए कहा, “प्रथम दृष्टया, यह एक गड़बड़ है। ऐसा प्रतीत होता है कि कोई भी व्यक्ति किसी भी समय राज्य में कहीं से भी अपनी इच्छानुसार जन्मतिथि का प्रमाण पत्र जारी करवा सकता है। एक तरह से, यह सभी स्तरों पर मौजूद बेईमानी की सीमा को दर्शाता है, और यह भी कि इन दस्तावेजों को बनवाना कितना आसान है, जिनका उपयोग आपराधिक अभियोजन के लिए भी, उनमें वर्णित तथ्यों के प्रथम दृष्टया मजबूत सबूत के रूप में किया जा सकता है।” यह मामला शिवंकी नामक व्यक्ति द्वारा दायर रिट याचिका की सुनवाई के दौरान प्रकाश में आया।
हाई कोर्ट के आदेश के अनुसरण में, यूआईडीएआई क्षेत्रीय कार्यालय लखनऊ के उप निदेशक ने याचिकाकर्ता से संबंधित कुछ दस्तावेज दाखिल किए, जिनमें दो अलग-अलग जन्म प्रमाण पत्र भी शामिल थे, जो जन्म और मृत्यु रजिस्ट्रार द्वारा जारी किए गए थे, लेकिन दो अलग-अलग स्थानों से। कोर्ट ने कहा कि मनौटा स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से जारी प्रथम प्रमाण पत्र में याचिकाकर्ता की जन्मतिथि 10 दिसंबर 2007 दर्ज है। हालांकि, हरसिंहपुर में ग्राम पंचायत से जारी दूसरे प्रमाण पत्र में जन्म की पूरी तरह से अलग तारीख दिखाई गई, जो- 1 जनवरी, 2005 है।
मामले की स्थिति पर गहरा असंतोष व्यक्त करते हुए कोर्ट ने कहा कि यह मामला बताता है कि ” इन दस्तावेजों को बनवाना कितना आसान है “। न्यायालय ने यह भी चेतावनी दी कि ऐसे दस्तावेजों का उपयोग उनमें वर्णित तथ्यों के प्रथम दृष्टया मजबूत साक्ष्य के रूप में किया जा सकता है, यहां तक कि आपराधिक मुकदमों के लिए भी।
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इसलिए, स्थिति को स्पष्ट करने के लिए, हाई कोर्ट ने चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव , इन प्रमाण पत्रों को जारी करने के प्रभारी विभाग (अब प्रतिवादी संख्या 4 के रूप में पक्षकार) को एक विस्तृत हलफनामा दायर करने का निर्देश दिया। प्रधान सचिव से उनके विभाग में विद्यमान मामलों की स्थिति, विशेष रूप से जन्म प्रमाण पत्र जारी करने के संबंध में स्पष्टीकरण देने को कहा गया है।
पीठ ने यह सुनिश्चित करने के लिए कि विभाग द्वारा कोई धोखाधड़ी प्रमाण पत्र जारी नहीं किया जा सके, मौजूदा कदमों या प्रावधानों का विवरण भी मांगा है। आदेश में आगे निर्देश दिया गया है, ” यदि सिस्टम में कमी है, तो वह यह भी सुझाव देंगे कि विभाग प्रणाली में मौजूद इस विसंगति को दूर करने के लिए क्या कदम उठाने का प्रस्ताव रखता है और यह सुनिश्चित करना है कि केवल एक ही जन्म प्रमाण पत्र जारी किया जाए।” कोर्ट मामले की अगली सुनवाई 10 दिसंबर को करेगा।
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