CJI BR Gavai: देश के निवर्तमान सीजेआई बीआर गवई ने अपने सेवानिवृत्ति के दिन जस्टिस विपुल पंचोली को सुप्रीम कोर्ट में पदोन्नत करने के प्रस्ताव पर कॉलेजियम में जस्टिस बीवी नागरत्ना की असहमति पर अपनी चुप्पी तोड़ी। उन्होंने कहा कि अगर कॉलेजियम में जस्टिस नागरत्ना की असहमति में दम होता, तो दूसरे जज भी उसे स्वीकार कर लेते। गवई ने कहा कि कॉलेजियम के भीतर असहमति कोई अभूतपूर्व (Unprecedented) बात नहीं है।

लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक, सीजेआई गवई ने आज अपने आधिकारिक आवास पर मीडिया से बातचीत के दौरान कहा, “कॉलेजियम में किसी न्यायाधीश की असहमति पर, यह पहली बार नहीं हो रहा है… अगर असहमति में कोई योग्यता होती, तो चार अन्य न्यायाधीश इस पर सहमत होते।”

मुख्य न्यायाधीश गवई ने इस बात पर भी खेद व्यक्त किया कि उनके कार्यकाल के दौरान सुप्रीम कोर्ट में किसी भी महिला न्यायाधीश की सिफारिश नहीं की जा सकी। उन्होंने कहा कि कॉलेजियम विचाराधीन महिला उम्मीदवारों पर आम सहमति तक नहीं पहुंच सका।

बीआर गवई ने दोहराया कि वे सेवानिवृत्ति के बाद वह सरकार से कोई नियुक्ति स्वीकार नहीं करेंगे। साथ हीकहा कि वे अपना समय अपने गृह जिले के आदिवासी समुदायों के कल्याण के लिए समर्पित करना चाहते हैं।

गवई ने यशवंत वर्मा मुद्दे पर टिप्पणी करने से इनकार करते हुए उन्होंने कहा कि मामला अब लोकसभा जांच समिति के समक्ष है। हाई कोर्ट के न्यायाधीशों के स्थानांतरण पर उन्होंने कहा कि ये निर्णय न्याय के बेहतर प्रशासन के हित में लिए गए हैं।

एक वकील द्वारा उन पर जूता फेंकने की कोशिश की घटना का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि माफ करने का निर्णय तत्काल लिया गया था। मुख्य न्यायाधीश गवई ने सोशल मीडिया की आलोचना की, क्योंकि इसमें न्यायाधीशों के ऐसे बयानों को अदालती कार्यवाही के लिए विकृत किया जा रहा है, जो कभी दिए ही नहीं गए।

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राष्ट्रपति संदर्भ में हाल ही में दी गई राय पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि न्यायालय संविधान में शब्द नहीं जोड़ सकता और इसलिए राष्ट्रपति या राज्यपालों के लिए समय-सीमा निर्धारित नहीं कर सकता। हालांकि, उन्होंने इस राय को संतुलित बताया और कहा कि इसमें इस बात पर ज़ोर दिया गया है कि राज्यपाल विधेयकों को अनिश्चित काल तक रोके नहीं रख सकते और राज्य अत्यधिक देरी की स्थिति में उपाय अपना सकते हैं।

अपने कार्यकाल के दौरान लागू किए गए एससी और एसटी आरक्षण की पृष्ठभूमि में सुप्रीम कोर्ट स्टाफ भर्ती में महिला आरक्षण की आवश्यकता पर एक प्रश्न का उत्तर देते हुए, सीजेआई गवई ने कहा कि उनके अनुभव से संकेत मिलता है कि महिलाओं को न्यायालय के प्रशासन में पर्याप्त प्रतिनिधित्व दिया गया है।

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