छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने शुक्रवार को पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल को शराब घोटाले से जुड़े मामलों में जमानत दे दी। यह फैसला न्यायमूर्ति अरविंद कुमार वर्मा ने सुनाया।

बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, अदालत ने चैतन्य बघेल की जमानत याचिकाएं दो मामलों में मंजूर कीं। पहला मामला प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा दर्ज मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा है और दूसरा मामला छत्तीसगढ़ की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) और भ्रष्टाचार विरोधी ब्यूरो (एसीबी) द्वारा दर्ज किया गया है।

ये मामले छत्तीसगढ़ में साल 2019 से 2023 के बीच कथित तौर पर चले एक बड़े शराब घोटाले से जुड़े हैं। आरोप है कि इस दौरान अवैध कमीशन लिया गया और शराब बिक्री से मिलने वाले सरकारी राजस्व में गड़बड़ी की गई।

जांच एजेंसियों का कहना है कि इस घोटाले में कुछ नेता, आबकारी विभाग के अधिकारी और निजी शराब कंपनियों से जुड़े लोग शामिल थे। इनके कारण राज्य सरकार को 3,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का नुकसान हुआ।

ईडी का कहना है कि बघेल को कथित अपराध से मिली कमाई का एक हिस्सा मिला और उसे रियल एस्टेट प्रोजेक्ट ‘विठ्ठल ग्रीन’ में लगाया गया। यह प्रोजेक्ट मेसर्स बघेल डेवलपर्स चलाता है। ईडी के मुताबिक, इसी प्रोजेक्ट में उन संपत्तियों को जब्त किया गया है, जिन्हें कथित तौर पर अवैध पैसों से खरीदा गया था।

ईडी ने सह-आरोपियों के बयानों के आधार पर दावा किया कि शराब घोटाले से मिली नकदी पहले बंसल के जरिए भेजी गई और फिर बघेल के प्रोजेक्ट में इस तरह लगाई गई कि पैसा पूरी तरह साफ और कानूनी लगे।

ईडी का यह भी आरोप है कि बघेल को अपराध की कमाई के तौर पर कम से कम 16.70 करोड़ रुपये मिले और वह शराब घोटाले से जुड़े 1,000 करोड़ रुपये से ज्यादा के लेन-देन में अहम भूमिका में थे। वहीं, ईओडब्ल्यू का आरोप है कि बघेल ने इस कथित शराब रैकेट से व्यक्तिगत रूप से 200 करोड़ रुपये से ज्यादा का फायदा उठाया।

यह भी पढ़ें- ‘अंबाजी मंदिर सार्वजनिक ट्रस्ट’, हाई कोर्ट ने शाही परिवार के सभी दावे खारिज किए; जानें 70 साल पुराना विवाद

दूसरी ओर, बघेल के वकील ने कहा कि उनके मुवक्किल के खिलाफ कार्रवाई राजनीतिक वजहों से की गई है। उनका आरोप है कि ईडी और ईओडब्ल्यू ने गिरफ्तारी और असहयोग जैसे आरोप लगाने के लिए एक ही तरह के तयशुदा (टेम्पलेट) तर्कों का इस्तेमाल किया है।

इससे पहले हाईकोर्ट ने ईओडब्ल्यू मामले में बघेल की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी और ईडी द्वारा की गई उनकी गिरफ्तारी को सही माना था। इसके बाद बघेल ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। सुप्रीम कोर्ट में उन्होंने अपनी गिरफ्तारी के साथ-साथ मनी लॉन्ड्रिंग कानून (पीएमएलए) के कुछ प्रावधानों को भी चुनौती दी है। यह मामला अभी सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है।

यह भी पढ़ें- 34 साल बाद इंसाफ: फैसले का इंतजार करते होटल कर्मचारी की मौत, सुप्रीम कोर्ट ने दिलाया बकाया वेतन